साहित्य

लघुकथा : लैला

Posted on:Fri, 26 Aug 2016 02:44 PM (IST)
        

एक दिन लोगों ने एक अनुपम सुंदरी को तेहरान के चौक में अपने डफ पर हाफिज की एक गजल झूम-झूम कर गाते सुना और पढ़ें »

लघुकथा: झांकी

Posted on:Wed, 24 Aug 2016 11:00 AM (IST)
        

भाई-बहिन दिन में कितनी बार लड़ते हैं, रोना-पीटना भी कई बार हो जाता है, पर ऐसा कभी नहीं होता कि घर में खाना न पके या कोई किसी से बोले नहीं।और पढ़ें »

लघुकथा: बंद दरवाजा

Posted on:Mon, 22 Aug 2016 11:12 AM (IST)
        

एक चिडिय़ा फुदकती हुई आई और सामने के सहन में बैठ गई। बच्चे के लिए मनोरंजन का यह नया सामान था। और पढ़ें »

प्रेमचंद की चर्चित कथा ईदगाह

Posted on:Sat, 20 Aug 2016 11:30 AM (IST)
        

गाँव में कितनी हलचल है। लड़के सबसे ज्यादा प्रसन्न हैं। किसी ने एक रोजा रखा है, वह भी दोपहर तक, किसी ने वह भी नहीं, लेकिन ईदगाह जाने की खुशी उनके हिस्स... और पढ़ें »

लघुकथा:घर जमाई

Posted on:Fri, 19 Aug 2016 10:52 AM (IST)
        

संध्या समय घरवाले गाने-बजाने चले जाते हैं, मैं घड़ी रात तक गाय-भैंसे दुहता रहता हूँ। उसका यह पुरस्कार मिल रहा है कि कोई खाने को भी नहीं पूछता। और पढ़ें »

इस धागे में वचन गुंथा है

Posted on:Tue, 16 Aug 2016 03:27 PM (IST)
        

बदलते दौर में जब दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए घर से बड़ी संख्या में निकल रही हैं लड़कियां, अधिक प्रासंगिक हो जाता है रक्षाबंधन का पर्व। और पढ़ें »

जब रक्षाबंधन है आता

Posted on:Sun, 14 Aug 2016 02:41 PM (IST)
        

जाति-धर्म के तोड़ता बंधन, फिर भी सबको है भाता।और पढ़ें »

राखी स्पेशल : मेहनत की मिठाई

Posted on:Sun, 14 Aug 2016 09:52 AM (IST)
        

रक्षाबंधन में जब नहीं मिले मिठाई के पैसे तो किशोर ने पढ़ाई के साथ काम में बंटाया पिता का हाथ और बदली घर की आर्थिक स्थिति...और पढ़ें »

स्वतंत्रता दिवस की पुकार

Posted on:Sat, 13 Aug 2016 01:47 PM (IST)
        

हिन्दू के नाते उनका दुख सुनते यदि तुम्हें लाज आती। तो सीमा के उस पार चलो सभ्यता जहाँ कुचली जाती॥और पढ़ें »

लघुकथा- ओछी मानसिकता

Posted on:Fri, 12 Aug 2016 12:50 PM (IST)
        

दीपावली में वैसे ही मुझे घर के काम से फुर्सत नहीं है और ऊपर से ये ढेर सारे दीये उठा लाए। अपनी इस ओछी मानसिकता को त्याग दोऔर पढ़ें »

लघुकथा: बीरबल की खिचड़ी

Posted on:Thu, 11 Aug 2016 12:56 PM (IST)
        

एक गरीब धोबी ने अपनी गरीबी दूर करने की खातिर नदी में घुटने तक डूबे रहकर पानी में ठिठुरते हुए सारी रात बिता दी।और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: सैलानी बंदर

Posted on:Wed, 10 Aug 2016 11:39 AM (IST)
        

मुहल्ले के लोगों के लिए भी मन्नू मनोरंजन की एक सामग्री थी। जब वह घर पर रहता तो एक न एक आदमी आकर उससे खेलता रहता।और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा देवी

Posted on:Tue, 09 Aug 2016 11:51 AM (IST)
        

एकाएक वह औरत उठी और इधर-उधर चौकन्नी आंखों से देखकर फकीर के हाथ में कुछ रख दिया और फिर बहुत धीमे से कुछ कहकर एक तरफ चली गई। और पढ़ें »

लघुकथा: पत्नी से पति

Posted on:Fri, 05 Aug 2016 11:49 AM (IST)
        

वह जिस वक्त अपने छज्जे पर खड़ी होकर सड़क पर निगाह दौड़ाती ओर कितनी ही महिलाओं को खद्दर की साडिय़ों पहने गर्व से सिर उठाते चलते देख्रती,और पढ़ें »

लघुकथा: प्रेम-सूत्र

Posted on:Thu, 04 Aug 2016 12:38 PM (IST)
        

वर्माजी सैर करने जा रहे थे, किन्तु प्रभा जाने को उत्सुक नहीं मालूम होती थी। वह एक कुर्सी पर बैठी हुई कोई उपन्यास पढ़ रही थी।और पढ़ें »

लघुकथा: बड़े घर की बेटी

Posted on:Wed, 03 Aug 2016 10:28 AM (IST)
        

आनंदी एक बड़े उच्च कुल की लड़की थी। वह अपनी सब बहनों से अधिक रूपवती और गुणवती थी। इससे ठाकुर भूपसिंह उसे बहुत प्यार करते थे। और पढ़ें »

लघु कथा: कश्मीरी सेब

Posted on:Thu, 28 Jul 2016 10:47 AM (IST)
        

फल खाने का समय तो प्रात:काल है। आज सुबह मुँह-हाथ धोकर जो नाश्ता करने के लिए एक सेब निकाला, तो सड़ा हुआ था।और पढ़ें »

लघुकथा: दूसरी शादी

Posted on:Tue, 02 Aug 2016 01:25 PM (IST)
        

औरत पैरह की जूती है, जब एक फट गई, दूसरी बदल ली। स्त्री का कितना भयानक अपमान है, यह कहकर मैं उनका मुंह बन्द कर दिया करता था। और पढ़ें »

लघुकथा: अनाथ लड़की

Posted on:Mon, 01 Aug 2016 12:36 PM (IST)
        

रोहिणी ने बड़े इत्मीनान और गर्व से अपनी सहेलियों की तरफ देखा। उसकी बड़ी-बड़ी आँखें खुशी से चमक रही थीं और चेहरा चॉँदनी रात की तरह खिला हुआ था।और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघु कथा: आख़िरी मंज़िल

Posted on:Fri, 29 Jul 2016 10:45 AM (IST)
        

मोहिनी का प्रेम वह प्रेम था जो मिलने में भी वियोग के मजे लेता है। मुझे खूब याद है एक बार जब उसी हौज के किनारे चॉँदनी रात में मेरी प्रेम झ्र भरी बातों ... और पढ़ें »

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