साहित्य

प्रेमचंद की लघुकथा: पंच परमेश्वर

Posted on:Mon, 17 Oct 2016 10:50 AM (IST)
        

मित्रता का मूलमंत्र भी यही है। इस मित्रता का जन्म उसी समय हुआ, जब दोनों मित्र बालक ही थे, और जुम्मन के पूज्य पिता, जुमराती, उन्हें शिक्षा प्रदान करते ... और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: नेकी

Posted on:Fri, 14 Oct 2016 11:28 AM (IST)
        

पण्डित जी ने सरस्वती की पूजा में ज्यादा लाभ न देखकर लक्ष्मी देवी की पूजा करनी शुरू की थी। लेन-देन का कार-बार करते थे मगर और महाजनों के विपरीत खास-खास ... और पढ़ें »

लघुकथा: बंटवारा

Posted on:Wed, 12 Oct 2016 10:47 AM (IST)
        

मित्रों तुम दोनों ने मिलकर यह मछली पकड़ तो ली है, परंतु इसका बंटवारा तुम कैसे करोगे। ज्यादा अच्छा हो यदि तुम किसी तीसरे से इसका बंटवारा करवाओ।और पढ़ें »

लघुकथा: रामलीला

Posted on:Fri, 07 Oct 2016 12:51 PM (IST)
        

एक जमाना वह था, जब मुझे भी रामलीला में आनंद आता था। आनंद तो बहुत हलका-सा शब्द है। वह आनंद उन्माद से कम न था। और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: शोक का पुरस्कार

Posted on:Thu, 06 Oct 2016 10:36 AM (IST)
        

मेरा नम्बर अव्वल था। वाइस चान्सलर ने खुद मुझसे हाथ मिलाया था और मुस्कराकर कहा था कि भगवान तुम्हें और भी बड़े कामों की शक्ति दे। और पढ़ें »

लघुकथा: शंखनाद

Posted on:Wed, 05 Oct 2016 02:54 PM (IST)
        

खिया साहब की ऐसी धाक बँधी हुई थी कि उनकी मरजी बिना गाँव में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता था। और पढ़ें »

लघुकथा: नसीहतों का दफ्तर

Posted on:Mon, 03 Oct 2016 10:39 AM (IST)
        

अच्छे दिनों के इन्तजार में बहुत दिन गुजर गए और आखिरकार जब अच्छे दिन आये, जब गार्डन पार्टियों में शरीक होने की दावतें आने लगीं, और पढ़ें »

बीरबल की बुद्धिमानी

Posted on:Fri, 30 Sep 2016 02:21 PM (IST)
        

स आदमी के जाने के बाद बीरबल बोले, यह आदमी चालाक जान पड़ता है। बेईमानी किए बिना नहीं रहेगा। अकबर को बीरबल की बात पर विश्वास नहीं हुआ।और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: सौत

Posted on:Thu, 29 Sep 2016 12:00 PM (IST)
        

पीली, कुंशागी रजिया भला इस नवयौवना के सामने क्या जांचती! फिर भी वह जाते हुए स्वामित्व को, जितने दिन हो सके अपने अधिकार में रखना चाहती थी। और पढ़ें »

तेनालीराम की कहानी- अरबी घोड़े

Posted on:Wed, 28 Sep 2016 10:47 AM (IST)
        

महाराज के आदेश पर बहुत से घोड़ों को विजयनगर के आम नागरिकों और राजदरबार के कुछ लोगों को तीन महीने तक देखभाल के लिए दे दिया जाता है।और पढ़ें »

लघुकथा: शादी की वजह

Posted on:Tue, 27 Sep 2016 11:55 AM (IST)
        

औरत और मर्द को प्रकृत्या एक-दूसरे की जरूरत होती है लेकिन मौजूदा हालत में आम तौर पर शादी की यह सच्ची वजह नही होती बल्कि शादी सभ्य जीवन की एक रस्म-सी हो... और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: पूस की रात

Posted on:Mon, 26 Sep 2016 12:13 PM (IST)
        

मजूरी में सुख से एक रोटी तो खाने को मिलेगी । किसी की धौंस तो न रहेगी। अच्छी खेती है ! मजूरी करके लाओं, वह भी उसी में झोंक दो, उस पर धौंस ।और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा:नेकी

Posted on:Tue, 20 Sep 2016 10:05 AM (IST)
        

सावन का महीना था। रेवती रानी ने पांव में मेहंदी रचायी, मांग-चोटी संवारी और तब अपनी बूढ़ी सास ने जाकर बोली—अम्मां जी, आज भी मेला देखने जाऊँगी।और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: घमंड का पुतला

Posted on:Mon, 12 Sep 2016 10:23 AM (IST)
        

फुटबाल के नाम से जिस प्राणी का जिक्र किया गया वह मेरा अर्दली था। उसे सिर्फ एक नजर देखने से यकीन हो जाता था कि यह नाम उसके लिए पूरी तरह उचित है। और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: जुलूस

Posted on:Fri, 09 Sep 2016 12:16 PM (IST)
        

शंभुनाथ ने दुकान की पटरी पर खड़े होकर अपने पड़ोसी दीनदयाल से कहा-सब के सब काल के मुँह में जा रहे हैं। और पढ़ें »

लघुकथा: आखिरी तोहफा

Posted on:Thu, 08 Sep 2016 10:42 AM (IST)
        

पढ़ें-लिखे आदमी थे, राष्ट्रीय भावनाओं से भी अपरिचित न थे, यथाशक्ति स्वदेशी चीजें ही इस्तेमाल करते थे। मगर इस मामले में बहुत कट्टर न थे। और पढ़ें »

शिक्षक दिवस पर विशेष: शिक्षक हैं हम

Posted on:Fri, 02 Sep 2016 11:00 AM (IST)
        

शिक्षक हैं हम समाज को जगाते रहेंगे, ये जिन्दगी का मंत्र है, सिखाते रहेंगे।और पढ़ें »

लघुकथा- स्वामिनी

Posted on:Thu, 01 Sep 2016 12:00 PM (IST)
        

अब घर देख-रेख करने वाला, धरने-उठाने वाला तुम्हारे सिवा दूसरा कौन है? रोओ मत बेटा, भगवान् की जो इच्छा थी, वह हुआ; और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: स्वर्ग की देवी

Posted on:Tue, 30 Aug 2016 12:01 PM (IST)
        

चरित्र या शिक्षा का स्थान गौण था। चरित्र तो किसी के माथे पर लिखा नही रहता और शिक्षा का आजकल के जमाने में मूल्य ही क्या?और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: नरक का मार्ग

Posted on:Mon, 29 Aug 2016 10:49 AM (IST)
        

संसार में ऐसी भी कोई स्त्री है, जिसका पति उसका श्रृंगार देखकर सिर से पांव तक जल उठे? और पढ़ें »

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