साहित्य

पंचतंत्र की कथाएं: नाग और चींटियां

Posted on:Thu, 24 Nov 2016 01:16 PM (IST)
        

रातभर नाग अपने भोजन की तलाश में रहता और दिन निकलने पर अपने बिल में जाकर सो रहता। धीरे-धीरे वह मोटा होता गया। वह इतना मोटा हो गया कि बिल के अंदर-बाहर आ... और पढ़ें »

लोककथा: बुआ जी की आंखें

Posted on:Wed, 23 Nov 2016 02:43 PM (IST)
        

गर्भावस्था में यदि किसी स्त्री को हंस का मांस खाने को मिल जाये तो उसकी होने वाली संतान अत्यंत मेधावी, तेजस्वी और भाग्यशाली होती है।और पढ़ें »

अकबर बीरबल के किस्से: चूडिय़ों की गिनती

Posted on:Fri, 18 Nov 2016 10:07 AM (IST)
        

जहांपनाह! मेरे हाथ का तो पत्नी के हाथों से दिन में एक-आध बार स्पर्श होता है, लेकिन आपका हाथ तो आपकी मूंछ पर दिन में दस या पांच बार तो अवश्य लगता है। भ... और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: पागल हाथी

Posted on:Wed, 16 Nov 2016 12:57 PM (IST)
        

मैं राजा का सबसे प्यारा हाथी था और कहां आज मामूली मजदूर हूं। यह सोचकर जोर-जोर से चिंघाड़ता और उछलता। आखिर एक दिन उसे इतना जोश आया कि उसने लोहे की जंजी... और पढ़ें »

लघुकथा: अनोखी तरकीब

Posted on:Tue, 15 Nov 2016 01:21 PM (IST)
        

जब सब लोग आ गये तो काजी ने उन सबको एक एक छड़ी देते हए कहा कि ये लो ये विशेष छडिय़ाँ है जिनकी मदद से मैं चोर को पहचान लेता हूँ। और पढ़ें »

कहानी (बाल दिवस): निर्दोष सलाह

Posted on:Mon, 14 Nov 2016 12:39 PM (IST)
        

क्यों चलते-चलते किसी के फिसलकर गिर पडऩे और चोटिल हो जाने पर सहारा देकर उठाने के बजाय लोग उस पर हंसें? क्या यही है मानवता!और पढ़ें »

लघुकथा: रेशम का सूत

Posted on:Fri, 11 Nov 2016 12:41 PM (IST)
        

पत्नी ने बहुत सोचा लेकिन इतनी ऊंची मीनार पर रेशम का सूत पहुंचाने का कोई भी विचार उसकी समझ में नहीं आया । और पढ़ें »

लघुकथा: मूर्खमंडली

Posted on:Thu, 10 Nov 2016 11:32 AM (IST)
        

बहेलिये ने सोचा कि मेरी उम्र बीत गयी है पक्षियों को पकड़ते-पकड़ते लेकिन आज तक ऐसा आश्चर्यजनक घटना नहीं देखी कि पक्षी की बीट से स्वर्ण बन जाता हो। और पढ़ें »

लघुकथा: राजकुमारी और सांप

Posted on:Wed, 09 Nov 2016 11:59 AM (IST)
        

महाराज आपको अपने कर्मो का फल अवश्य मिले' रोज-रोज के ये कड़वे वचन सुनकर राजा अपनी दूसरी पुत्री से तंग आ गया था और पढ़ें »

कुंए का विवाह और तेनालीराम

Posted on:Tue, 08 Nov 2016 01:53 PM (IST)
        

राजा ने तुरंत तेनालीराम को खोजने के लिए अपने सैनिकों को भेजा। आसपास का पूरा क्षेत्र छान मारा पर तेनालीराम का कोई अता पता नहीं चला। और पढ़ें »

बदल रही हैं स्त्रियां बदल रहा है समाज

Posted on:Mon, 07 Nov 2016 10:15 AM (IST)
        

पिटने की, दुत्कारे जाने की और अत्याचारों को सहने की भी कोई तो सीमा होती है उसके आगे होता है-विद्रोह...और पढ़ें »

लघुकथा: हिम्मत व बुद्धि से लें काम

Posted on:Fri, 04 Nov 2016 12:34 PM (IST)
        

मैं डरा हुआ था, तभी मुझे अपने पापा की कही बात याद आई कि नए रास्ते पर जाते समय रास्ते की कुछ चीजें या पहचान याद रखनी चाहिए, ताकि हमे रास्ता ढूंढऩे में ... और पढ़ें »

लघुकथा: खुद को छोड़ दो

Posted on:Thu, 03 Nov 2016 10:25 AM (IST)
        

आश्रम के प्रधान साधू ने कहा जो कुछ तुम्हारे पास है, उसे छोड़ दो। परमात्मा को पाना तो बहुत ही सरल है तो राजा ने यही किया और अपनी सारी सम्पति जो है वो ग... और पढ़ें »

लघुकथा: कर्मो का फल

Posted on:Wed, 02 Nov 2016 03:30 PM (IST)
        

राजा ने अपने मंत्रियों को दरबार में बुलाया और तीनों को आदेश दिया कि एक-एक थैला लेकर बगीचे में जाए और वहां से अच्छे- अच्छे फल जमा करके लाएं और पढ़ें »

लघुकथा- रंग का राज

Posted on:Tue, 01 Nov 2016 02:26 PM (IST)
        

बीरबल ने हमेशा ही तरह तपाक से जवाब दिया कि बादशाह सलामत आप मेरे रंग का राज नहीं जानते इसलिए ये बात कह रहे है। और पढ़ें »

त्योहार पर मिला सबक

Posted on:Fri, 28 Oct 2016 01:04 PM (IST)
        

हार के आने से कई दिन पहले से ही उसका आनंद लेना और मजे करना मुझे बहुत प्रिय था। खासतौर से दिवाली आने से 15 से 20 दिन पहले से ही मैं पटाखे खरीदने की जिद... और पढ़ें »

लघुकथा: शोक की लहर

Posted on:Tue, 25 Oct 2016 03:54 PM (IST)
        

अपनी प्राइवेट नौकरी से प्राप्त दो हजार रूपये के मासिक वेतन से इस भीषण मँहगाई में वह दीपावली की खुशियां कैसे खरीदे? रघु यह सोचकर मन-ही-मन व्याकुल हो रह... और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: मोटेराम जी शास्त्री

Posted on:Mon, 24 Oct 2016 02:06 PM (IST)
        

स्वदेशी आन्दोलन के दिनों में आपने उस आन्दोलन का खूब विरोध किया था। स्वराज्य आन्दोलन के दिनों मे भी अपने अधिकारियों से राजभक्ति की सनद हासिल की थी।और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: सिर्फ एक आवाज

Posted on:Fri, 21 Oct 2016 10:31 AM (IST)
        

फागुन का महीना है, गाने को तरस गये। आज खूब गाना-बजाना होगा। ठाकुर साहब थे तो बूढ़े, लेकिन बुढ़ापे का असर दिल तक नहीं पहुँचा था। उन्हें इस बात का गर्व ... और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: मिलाप

Posted on:Tue, 18 Oct 2016 02:19 PM (IST)
        

ज्ञानचन्द ने बेटे को सीधे रास्ते पर लोने की बहुत कोशिश की थी मगर सफल न हुए। उनकी डॉँट-फटकार और समझाना-बुझाना बेकार हुआ। उसकी संगति अच्छी न थी। और पढ़ें »

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