साहित्य

प्रेमचंद की लघुकथा: सौत

Posted on:Thu, 29 Sep 2016 12:00 PM (IST)
        

पीली, कुंशागी रजिया भला इस नवयौवना के सामने क्या जांचती! फिर भी वह जाते हुए स्वामित्व को, जितने दिन हो सके अपने अधिकार में रखना चाहती थी। और पढ़ें »

तेनालीराम की कहानी- अरबी घोड़े

Posted on:Wed, 28 Sep 2016 10:47 AM (IST)
        

महाराज के आदेश पर बहुत से घोड़ों को विजयनगर के आम नागरिकों और राजदरबार के कुछ लोगों को तीन महीने तक देखभाल के लिए दे दिया जाता है।और पढ़ें »

लघुकथा: शादी की वजह

Posted on:Tue, 27 Sep 2016 11:55 AM (IST)
        

औरत और मर्द को प्रकृत्या एक-दूसरे की जरूरत होती है लेकिन मौजूदा हालत में आम तौर पर शादी की यह सच्ची वजह नही होती बल्कि शादी सभ्य जीवन की एक रस्म-सी हो... और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: पूस की रात

Posted on:Mon, 26 Sep 2016 12:13 PM (IST)
        

मजूरी में सुख से एक रोटी तो खाने को मिलेगी । किसी की धौंस तो न रहेगी। अच्छी खेती है ! मजूरी करके लाओं, वह भी उसी में झोंक दो, उस पर धौंस ।और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा:नेकी

Posted on:Tue, 20 Sep 2016 10:05 AM (IST)
        

सावन का महीना था। रेवती रानी ने पांव में मेहंदी रचायी, मांग-चोटी संवारी और तब अपनी बूढ़ी सास ने जाकर बोली—अम्मां जी, आज भी मेला देखने जाऊँगी।और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: घमंड का पुतला

Posted on:Mon, 12 Sep 2016 10:23 AM (IST)
        

फुटबाल के नाम से जिस प्राणी का जिक्र किया गया वह मेरा अर्दली था। उसे सिर्फ एक नजर देखने से यकीन हो जाता था कि यह नाम उसके लिए पूरी तरह उचित है। और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: जुलूस

Posted on:Fri, 09 Sep 2016 12:16 PM (IST)
        

शंभुनाथ ने दुकान की पटरी पर खड़े होकर अपने पड़ोसी दीनदयाल से कहा-सब के सब काल के मुँह में जा रहे हैं। और पढ़ें »

लघुकथा: आखिरी तोहफा

Posted on:Thu, 08 Sep 2016 10:42 AM (IST)
        

पढ़ें-लिखे आदमी थे, राष्ट्रीय भावनाओं से भी अपरिचित न थे, यथाशक्ति स्वदेशी चीजें ही इस्तेमाल करते थे। मगर इस मामले में बहुत कट्टर न थे। और पढ़ें »

शिक्षक दिवस पर विशेष: शिक्षक हैं हम

Posted on:Fri, 02 Sep 2016 11:00 AM (IST)
        

शिक्षक हैं हम समाज को जगाते रहेंगे, ये जिन्दगी का मंत्र है, सिखाते रहेंगे।और पढ़ें »

लघुकथा- स्वामिनी

Posted on:Thu, 01 Sep 2016 12:00 PM (IST)
        

अब घर देख-रेख करने वाला, धरने-उठाने वाला तुम्हारे सिवा दूसरा कौन है? रोओ मत बेटा, भगवान् की जो इच्छा थी, वह हुआ; और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: स्वर्ग की देवी

Posted on:Tue, 30 Aug 2016 12:01 PM (IST)
        

चरित्र या शिक्षा का स्थान गौण था। चरित्र तो किसी के माथे पर लिखा नही रहता और शिक्षा का आजकल के जमाने में मूल्य ही क्या?और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: नरक का मार्ग

Posted on:Mon, 29 Aug 2016 10:49 AM (IST)
        

संसार में ऐसी भी कोई स्त्री है, जिसका पति उसका श्रृंगार देखकर सिर से पांव तक जल उठे? और पढ़ें »

लघुकथा : लैला

Posted on:Fri, 26 Aug 2016 02:44 PM (IST)
        

एक दिन लोगों ने एक अनुपम सुंदरी को तेहरान के चौक में अपने डफ पर हाफिज की एक गजल झूम-झूम कर गाते सुना और पढ़ें »

लघुकथा: झांकी

Posted on:Wed, 24 Aug 2016 11:00 AM (IST)
        

भाई-बहिन दिन में कितनी बार लड़ते हैं, रोना-पीटना भी कई बार हो जाता है, पर ऐसा कभी नहीं होता कि घर में खाना न पके या कोई किसी से बोले नहीं।और पढ़ें »

लघुकथा: बंद दरवाजा

Posted on:Mon, 22 Aug 2016 11:12 AM (IST)
        

एक चिडिय़ा फुदकती हुई आई और सामने के सहन में बैठ गई। बच्चे के लिए मनोरंजन का यह नया सामान था। और पढ़ें »

प्रेमचंद की चर्चित कथा ईदगाह

Posted on:Sat, 20 Aug 2016 11:30 AM (IST)
        

गाँव में कितनी हलचल है। लड़के सबसे ज्यादा प्रसन्न हैं। किसी ने एक रोजा रखा है, वह भी दोपहर तक, किसी ने वह भी नहीं, लेकिन ईदगाह जाने की खुशी उनके हिस्स... और पढ़ें »

लघुकथा:घर जमाई

Posted on:Fri, 19 Aug 2016 10:52 AM (IST)
        

संध्या समय घरवाले गाने-बजाने चले जाते हैं, मैं घड़ी रात तक गाय-भैंसे दुहता रहता हूँ। उसका यह पुरस्कार मिल रहा है कि कोई खाने को भी नहीं पूछता। और पढ़ें »

इस धागे में वचन गुंथा है

Posted on:Tue, 16 Aug 2016 03:27 PM (IST)
        

बदलते दौर में जब दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए घर से बड़ी संख्या में निकल रही हैं लड़कियां, अधिक प्रासंगिक हो जाता है रक्षाबंधन का पर्व। और पढ़ें »

जब रक्षाबंधन है आता

Posted on:Sun, 14 Aug 2016 02:41 PM (IST)
        

जाति-धर्म के तोड़ता बंधन, फिर भी सबको है भाता।और पढ़ें »

राखी स्पेशल : मेहनत की मिठाई

Posted on:Sun, 14 Aug 2016 09:52 AM (IST)
        

रक्षाबंधन में जब नहीं मिले मिठाई के पैसे तो किशोर ने पढ़ाई के साथ काम में बंटाया पिता का हाथ और बदली घर की आर्थिक स्थिति...और पढ़ें »

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