साहित्य

लघुकथा: राजकुमारी और सांप

Posted on:Wed, 09 Nov 2016 11:59 AM (IST)
        

महाराज आपको अपने कर्मो का फल अवश्य मिले' रोज-रोज के ये कड़वे वचन सुनकर राजा अपनी दूसरी पुत्री से तंग आ गया था और पढ़ें »

कुंए का विवाह और तेनालीराम

Posted on:Tue, 08 Nov 2016 01:53 PM (IST)
        

राजा ने तुरंत तेनालीराम को खोजने के लिए अपने सैनिकों को भेजा। आसपास का पूरा क्षेत्र छान मारा पर तेनालीराम का कोई अता पता नहीं चला। और पढ़ें »

बदल रही हैं स्त्रियां बदल रहा है समाज

Posted on:Mon, 07 Nov 2016 10:15 AM (IST)
        

पिटने की, दुत्कारे जाने की और अत्याचारों को सहने की भी कोई तो सीमा होती है उसके आगे होता है-विद्रोह...और पढ़ें »

लघुकथा: हिम्मत व बुद्धि से लें काम

Posted on:Fri, 04 Nov 2016 12:34 PM (IST)
        

मैं डरा हुआ था, तभी मुझे अपने पापा की कही बात याद आई कि नए रास्ते पर जाते समय रास्ते की कुछ चीजें या पहचान याद रखनी चाहिए, ताकि हमे रास्ता ढूंढऩे में ... और पढ़ें »

लघुकथा: खुद को छोड़ दो

Posted on:Thu, 03 Nov 2016 10:25 AM (IST)
        

आश्रम के प्रधान साधू ने कहा जो कुछ तुम्हारे पास है, उसे छोड़ दो। परमात्मा को पाना तो बहुत ही सरल है तो राजा ने यही किया और अपनी सारी सम्पति जो है वो ग... और पढ़ें »

लघुकथा: कर्मो का फल

Posted on:Wed, 02 Nov 2016 03:30 PM (IST)
        

राजा ने अपने मंत्रियों को दरबार में बुलाया और तीनों को आदेश दिया कि एक-एक थैला लेकर बगीचे में जाए और वहां से अच्छे- अच्छे फल जमा करके लाएं और पढ़ें »

लघुकथा- रंग का राज

Posted on:Tue, 01 Nov 2016 02:26 PM (IST)
        

बीरबल ने हमेशा ही तरह तपाक से जवाब दिया कि बादशाह सलामत आप मेरे रंग का राज नहीं जानते इसलिए ये बात कह रहे है। और पढ़ें »

त्योहार पर मिला सबक

Posted on:Fri, 28 Oct 2016 01:04 PM (IST)
        

हार के आने से कई दिन पहले से ही उसका आनंद लेना और मजे करना मुझे बहुत प्रिय था। खासतौर से दिवाली आने से 15 से 20 दिन पहले से ही मैं पटाखे खरीदने की जिद... और पढ़ें »

लघुकथा: शोक की लहर

Posted on:Tue, 25 Oct 2016 03:54 PM (IST)
        

अपनी प्राइवेट नौकरी से प्राप्त दो हजार रूपये के मासिक वेतन से इस भीषण मँहगाई में वह दीपावली की खुशियां कैसे खरीदे? रघु यह सोचकर मन-ही-मन व्याकुल हो रह... और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: मोटेराम जी शास्त्री

Posted on:Mon, 24 Oct 2016 02:06 PM (IST)
        

स्वदेशी आन्दोलन के दिनों में आपने उस आन्दोलन का खूब विरोध किया था। स्वराज्य आन्दोलन के दिनों मे भी अपने अधिकारियों से राजभक्ति की सनद हासिल की थी।और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: सिर्फ एक आवाज

Posted on:Fri, 21 Oct 2016 10:31 AM (IST)
        

फागुन का महीना है, गाने को तरस गये। आज खूब गाना-बजाना होगा। ठाकुर साहब थे तो बूढ़े, लेकिन बुढ़ापे का असर दिल तक नहीं पहुँचा था। उन्हें इस बात का गर्व ... और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: मिलाप

Posted on:Tue, 18 Oct 2016 02:19 PM (IST)
        

ज्ञानचन्द ने बेटे को सीधे रास्ते पर लोने की बहुत कोशिश की थी मगर सफल न हुए। उनकी डॉँट-फटकार और समझाना-बुझाना बेकार हुआ। उसकी संगति अच्छी न थी। और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: पंच परमेश्वर

Posted on:Mon, 17 Oct 2016 10:50 AM (IST)
        

मित्रता का मूलमंत्र भी यही है। इस मित्रता का जन्म उसी समय हुआ, जब दोनों मित्र बालक ही थे, और जुम्मन के पूज्य पिता, जुमराती, उन्हें शिक्षा प्रदान करते ... और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: नेकी

Posted on:Fri, 14 Oct 2016 11:28 AM (IST)
        

पण्डित जी ने सरस्वती की पूजा में ज्यादा लाभ न देखकर लक्ष्मी देवी की पूजा करनी शुरू की थी। लेन-देन का कार-बार करते थे मगर और महाजनों के विपरीत खास-खास ... और पढ़ें »

लघुकथा: बंटवारा

Posted on:Wed, 12 Oct 2016 10:47 AM (IST)
        

मित्रों तुम दोनों ने मिलकर यह मछली पकड़ तो ली है, परंतु इसका बंटवारा तुम कैसे करोगे। ज्यादा अच्छा हो यदि तुम किसी तीसरे से इसका बंटवारा करवाओ।और पढ़ें »

लघुकथा: रामलीला

Posted on:Fri, 07 Oct 2016 12:51 PM (IST)
        

एक जमाना वह था, जब मुझे भी रामलीला में आनंद आता था। आनंद तो बहुत हलका-सा शब्द है। वह आनंद उन्माद से कम न था। और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: शोक का पुरस्कार

Posted on:Thu, 06 Oct 2016 10:36 AM (IST)
        

मेरा नम्बर अव्वल था। वाइस चान्सलर ने खुद मुझसे हाथ मिलाया था और मुस्कराकर कहा था कि भगवान तुम्हें और भी बड़े कामों की शक्ति दे। और पढ़ें »

लघुकथा: शंखनाद

Posted on:Wed, 05 Oct 2016 02:54 PM (IST)
        

खिया साहब की ऐसी धाक बँधी हुई थी कि उनकी मरजी बिना गाँव में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता था। और पढ़ें »

लघुकथा: नसीहतों का दफ्तर

Posted on:Mon, 03 Oct 2016 10:39 AM (IST)
        

अच्छे दिनों के इन्तजार में बहुत दिन गुजर गए और आखिरकार जब अच्छे दिन आये, जब गार्डन पार्टियों में शरीक होने की दावतें आने लगीं, और पढ़ें »

बीरबल की बुद्धिमानी

Posted on:Fri, 30 Sep 2016 02:21 PM (IST)
        

स आदमी के जाने के बाद बीरबल बोले, यह आदमी चालाक जान पड़ता है। बेईमानी किए बिना नहीं रहेगा। अकबर को बीरबल की बात पर विश्वास नहीं हुआ।और पढ़ें »

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