साहित्य

प्रेमचंद की लघुकथा: आत्म-संगीत

Posted on:Tue, 10 Jan 2017 04:06 PM (IST)
        

रानी मनोरमा ने आज गुरु-दीक्षा ली थी। दिन-भर दान और व्रत में व्यस्त रहने के बाद मीठी नींद की गोद में सो रही थी। अकस्मात् उसकी ऑंखें खुलीं और ये मनोहर ध... और पढ़ें »

प्रेमचंद की बाल कहानी मिट्ठू

Posted on:Mon, 09 Jan 2017 03:54 PM (IST)
        

कुछ दिन हुए लखनऊ में एक सरकस-कंपनी आयी थी। उसके पास शेर, भालू, चीता और कई तरह के और भी जानवर थे। इनके सिवा एक बंदर मिट्ठू भी था। और पढ़ें »

लघुकथा: मन का बोझ

Posted on:Fri, 06 Jan 2017 03:56 PM (IST)
        

गुरु के हाथ में कमंडल था और शिष्य के हाथ में एक झोली थी जिसे वो बड़ी सावधानी से पकड़े हुए थेऔर पढ़ें »

लघुकथा: शैतान का दाहिना हाथ

Posted on:Thu, 05 Jan 2017 04:17 PM (IST)
        

शैतान ने अपने सभी गुलामों को एक पंक्ति में खड़ा किया जिसमें से बुराई, झूठ, लोभ, अहंकार और ईष्र्या भी शामिल थे तो शैतान के भक्त उन्हें खरीदने आयेऔर पढ़ें »

लघुकथा: कद्दू की तीर्थयात्रा

Posted on:Wed, 04 Jan 2017 04:41 PM (IST)
        

मैं तुम्हें ये कद्दू देता हूँ तुम इस को साथ तीर्थ यात्रा पर ले जाओ और जिस जगह तुम स्नान करो वहां इसे स्नान करवा देना और पढ़ें »

लघुकथा: थोड़ा सोचा होता तो

Posted on:Tue, 03 Jan 2017 03:54 PM (IST)
        

तुम जो भी इस जादुई घड़े से मांगोगे ये पूरी कर देगा पर जिस दिन यह घड़ा फूट जायेगा जो कुछ भी इसने दिया है वो गायब हो जायेगा।और पढ़ें »

लघुकथा: किसी के जाने से कुछ नहीं रुकता है

Posted on:Sat, 31 Dec 2016 04:33 PM (IST)
        

एक दिन वह किसी संत के आश्रम में पहुंचा तो संत कह रहे थे की दुनिया में किसी के बिना किसी का काम नहीं रुकता है यह व्यर्थ का अभिमान है कि किसी के बिना को... और पढ़ें »

लघुकथा: भगवान का वास कहां है

Posted on:Fri, 30 Dec 2016 03:12 PM (IST)
        

भगवान के विचारों का आदर करते-करते देवताओं ने अपने-अपने विचार प्रकट किये। गणेश जी बोले आप हिमालय की चोटी पर चले जाएं। तो भगवान ने कहा वह स्थान तो मनुष्... और पढ़ें »

लघुकथा: सुखी आदमी का कुर्ता

Posted on:Wed, 28 Dec 2016 12:08 PM (IST)
        

एक बूढ़े ने राजा को आकर कहा कि महाराज आप मुझे अपनी बीमारी का इलाज करने की अनुमति दीजिये मैं ये कर सकता हूं। राजा की आज्ञा पाकर उस व्यक्ति ने राजा को क... और पढ़ें »

लघुकथा: सूरत से अधिक सीरत

Posted on:Mon, 26 Dec 2016 02:03 PM (IST)
        

सुकरात उसकी मुस्कुराहट का राज समझ गये थे। थोड़ी देर बाद सुकरात ने शिष्य से बोला मुझे तुम्हारे मुस्कुराने की वजह पता है शायद तुम इसी लिए मुस्कुरा रहे ह... और पढ़ें »

लघुकथा: एक रुपया

Posted on:Sat, 24 Dec 2016 04:05 PM (IST)
        

महात्मा तो वैरागी और संतोष से भरे व्यक्ति थे भला एक रूपये का क्या करते और पढ़ें »

डाक का चक्कर

Posted on:Tue, 20 Dec 2016 04:49 PM (IST)
        

हमें लगने लगा कि हमारी अनेक रचनाओं के स्वीकृति- पत्र, पत्र-पत्रिकाओं में छपी हमारी रचनाओं वली लेखकीय प्रतियां, पारिश्रमिक के चैक, हमारी छपी हुई रचनाओं... और पढ़ें »

मुल्ला नसरूद्दीन की नई पत्नी और कोर्ट

Posted on:Wed, 14 Dec 2016 12:36 PM (IST)
        

मुल्ला नसरुद्दीन से ये सहा नहीं गया उसने जवाब दिया 'मेरी पहले वाली पत्नी तुमसे अधिक सुंदर और भली थी।' मुल्ला नसरुद्दीन की पत्नी ने जवाब दिया 'मेरे पहल... और पढ़ें »

लघुकथा: संतोष का धन

Posted on:Mon, 05 Dec 2016 03:31 PM (IST)
        

पंडित जी ने पत्नी की और एक नजर से देखा फिर बिना किसी जवाब के वो घर से चल दिए शाम को वो जब वापिस लौटकर आये तो भोजन के समय थाली में कुछ उबले हुई चावल और... और पढ़ें »

अकबर बीरबल के किस्से: मासूम सजा

Posted on:Sat, 03 Dec 2016 12:58 PM (IST)
        

अकबर बीरबल के मजेदार किस्से... और पढ़ें »

मंटों की कहानी: टोबा टेक सिंह

Posted on:Wed, 30 Nov 2016 04:39 PM (IST)
        

लाहौर के पागलखानों में जब इस तबादले की खबर पहुंची तो बड़ी दिलचस्प चीमेगोइयां होने लगी। एक मुसलमान पागल जो बारह बरस से हर रोज बाकायदगी के साथ जमींदार प... और पढ़ें »

हार की जीत

Posted on:Tue, 29 Nov 2016 04:07 PM (IST)
        

खडग़सिंह उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू था। लोग उसका नाम सुनकर काँपते थे। होते-होते सुल्तान की कीर्ति उसके कानों तक भी पहुँची। उसका हृदय उसे देखने के लिए अध... और पढ़ें »

लघुकथा: निंदिया लागी

Posted on:Mon, 28 Nov 2016 01:39 PM (IST)
        

वह अपूर्व सुंदरी थी। उसकी बंद आंखों में सपने थे। सपने में साजन थे, साजन सेज पर थे और सेज महमह कर रही थी।और पढ़ें »

लघुकथा: पाजेब

Posted on:Sat, 26 Nov 2016 04:17 PM (IST)
        

पास-पड़ोस में तो सब नन्हीं-बड़ी के पैरों में आप वही पाजेब देख लीजिए। एक ने पहनी कि फिर दूसरी ने भी पहनी। देखा-देखी में इस तरह उनका न पहनना मुश्किल हो ... और पढ़ें »

लोककथा: बुद्धि बड़ी या पैसा

Posted on:Fri, 25 Nov 2016 02:30 PM (IST)
        

राजा सिर से पैर तक पैसे के मद में डूबा था; परंतु उसकी रानी बड़ी बद्विमती थी। वह पैसे को तुच्छ और बुद्वि को श्रेष्ठ समझती थी। रानी की चतुराई के कारण रा... और पढ़ें »

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