साहित्य

लघुकथा: सुखी आदमी का कुर्ता

Posted on:Wed, 28 Dec 2016 12:08 PM (IST)
        

एक बूढ़े ने राजा को आकर कहा कि महाराज आप मुझे अपनी बीमारी का इलाज करने की अनुमति दीजिये मैं ये कर सकता हूं। राजा की आज्ञा पाकर उस व्यक्ति ने राजा को क... और पढ़ें »

लघुकथा: सूरत से अधिक सीरत

Posted on:Mon, 26 Dec 2016 02:03 PM (IST)
        

सुकरात उसकी मुस्कुराहट का राज समझ गये थे। थोड़ी देर बाद सुकरात ने शिष्य से बोला मुझे तुम्हारे मुस्कुराने की वजह पता है शायद तुम इसी लिए मुस्कुरा रहे ह... और पढ़ें »

लघुकथा: एक रुपया

Posted on:Sat, 24 Dec 2016 04:05 PM (IST)
        

महात्मा तो वैरागी और संतोष से भरे व्यक्ति थे भला एक रूपये का क्या करते और पढ़ें »

डाक का चक्कर

Posted on:Tue, 20 Dec 2016 04:49 PM (IST)
        

हमें लगने लगा कि हमारी अनेक रचनाओं के स्वीकृति- पत्र, पत्र-पत्रिकाओं में छपी हमारी रचनाओं वली लेखकीय प्रतियां, पारिश्रमिक के चैक, हमारी छपी हुई रचनाओं... और पढ़ें »

मुल्ला नसरूद्दीन की नई पत्नी और कोर्ट

Posted on:Wed, 14 Dec 2016 12:36 PM (IST)
        

मुल्ला नसरुद्दीन से ये सहा नहीं गया उसने जवाब दिया 'मेरी पहले वाली पत्नी तुमसे अधिक सुंदर और भली थी।' मुल्ला नसरुद्दीन की पत्नी ने जवाब दिया 'मेरे पहल... और पढ़ें »

लघुकथा: संतोष का धन

Posted on:Mon, 05 Dec 2016 03:31 PM (IST)
        

पंडित जी ने पत्नी की और एक नजर से देखा फिर बिना किसी जवाब के वो घर से चल दिए शाम को वो जब वापिस लौटकर आये तो भोजन के समय थाली में कुछ उबले हुई चावल और... और पढ़ें »

अकबर बीरबल के किस्से: मासूम सजा

Posted on:Sat, 03 Dec 2016 12:58 PM (IST)
        

अकबर बीरबल के मजेदार किस्से... और पढ़ें »

मंटों की कहानी: टोबा टेक सिंह

Posted on:Wed, 30 Nov 2016 04:39 PM (IST)
        

लाहौर के पागलखानों में जब इस तबादले की खबर पहुंची तो बड़ी दिलचस्प चीमेगोइयां होने लगी। एक मुसलमान पागल जो बारह बरस से हर रोज बाकायदगी के साथ जमींदार प... और पढ़ें »

हार की जीत

Posted on:Tue, 29 Nov 2016 04:07 PM (IST)
        

खडग़सिंह उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू था। लोग उसका नाम सुनकर काँपते थे। होते-होते सुल्तान की कीर्ति उसके कानों तक भी पहुँची। उसका हृदय उसे देखने के लिए अध... और पढ़ें »

लघुकथा: निंदिया लागी

Posted on:Mon, 28 Nov 2016 01:39 PM (IST)
        

वह अपूर्व सुंदरी थी। उसकी बंद आंखों में सपने थे। सपने में साजन थे, साजन सेज पर थे और सेज महमह कर रही थी।और पढ़ें »

लघुकथा: पाजेब

Posted on:Sat, 26 Nov 2016 04:17 PM (IST)
        

पास-पड़ोस में तो सब नन्हीं-बड़ी के पैरों में आप वही पाजेब देख लीजिए। एक ने पहनी कि फिर दूसरी ने भी पहनी। देखा-देखी में इस तरह उनका न पहनना मुश्किल हो ... और पढ़ें »

लोककथा: बुद्धि बड़ी या पैसा

Posted on:Fri, 25 Nov 2016 02:30 PM (IST)
        

राजा सिर से पैर तक पैसे के मद में डूबा था; परंतु उसकी रानी बड़ी बद्विमती थी। वह पैसे को तुच्छ और बुद्वि को श्रेष्ठ समझती थी। रानी की चतुराई के कारण रा... और पढ़ें »

पंचतंत्र की कथाएं: नाग और चींटियां

Posted on:Thu, 24 Nov 2016 01:16 PM (IST)
        

रातभर नाग अपने भोजन की तलाश में रहता और दिन निकलने पर अपने बिल में जाकर सो रहता। धीरे-धीरे वह मोटा होता गया। वह इतना मोटा हो गया कि बिल के अंदर-बाहर आ... और पढ़ें »

लोककथा: बुआ जी की आंखें

Posted on:Wed, 23 Nov 2016 02:43 PM (IST)
        

गर्भावस्था में यदि किसी स्त्री को हंस का मांस खाने को मिल जाये तो उसकी होने वाली संतान अत्यंत मेधावी, तेजस्वी और भाग्यशाली होती है।और पढ़ें »

अकबर बीरबल के किस्से: चूडिय़ों की गिनती

Posted on:Fri, 18 Nov 2016 10:07 AM (IST)
        

जहांपनाह! मेरे हाथ का तो पत्नी के हाथों से दिन में एक-आध बार स्पर्श होता है, लेकिन आपका हाथ तो आपकी मूंछ पर दिन में दस या पांच बार तो अवश्य लगता है। भ... और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: पागल हाथी

Posted on:Wed, 16 Nov 2016 12:57 PM (IST)
        

मैं राजा का सबसे प्यारा हाथी था और कहां आज मामूली मजदूर हूं। यह सोचकर जोर-जोर से चिंघाड़ता और उछलता। आखिर एक दिन उसे इतना जोश आया कि उसने लोहे की जंजी... और पढ़ें »

लघुकथा: अनोखी तरकीब

Posted on:Tue, 15 Nov 2016 01:21 PM (IST)
        

जब सब लोग आ गये तो काजी ने उन सबको एक एक छड़ी देते हए कहा कि ये लो ये विशेष छडिय़ाँ है जिनकी मदद से मैं चोर को पहचान लेता हूँ। और पढ़ें »

कहानी (बाल दिवस): निर्दोष सलाह

Posted on:Mon, 14 Nov 2016 12:39 PM (IST)
        

क्यों चलते-चलते किसी के फिसलकर गिर पडऩे और चोटिल हो जाने पर सहारा देकर उठाने के बजाय लोग उस पर हंसें? क्या यही है मानवता!और पढ़ें »

लघुकथा: रेशम का सूत

Posted on:Fri, 11 Nov 2016 12:41 PM (IST)
        

पत्नी ने बहुत सोचा लेकिन इतनी ऊंची मीनार पर रेशम का सूत पहुंचाने का कोई भी विचार उसकी समझ में नहीं आया । और पढ़ें »

लघुकथा: मूर्खमंडली

Posted on:Thu, 10 Nov 2016 11:32 AM (IST)
        

बहेलिये ने सोचा कि मेरी उम्र बीत गयी है पक्षियों को पकड़ते-पकड़ते लेकिन आज तक ऐसा आश्चर्यजनक घटना नहीं देखी कि पक्षी की बीट से स्वर्ण बन जाता हो। और पढ़ें »

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