साहित्य

पुरुष विमर्श की सार्थक पक्षधरता

Posted on:Fri, 17 Feb 2017 11:03 AM (IST)
        

प्रस्तुत उपन्यास में देवेन त्रिपाठी पर्यटन मंत्रालय के अधीन एक निकाय में प्रतिष्ठित पद पर कार्यरत हैं। उसी ऑफिस में बॉस पूर्णिमा सूद के आने से अचानक ब... और पढ़ें »

कहानी: हार में मिली जीत

Posted on:Wed, 15 Feb 2017 02:44 PM (IST)
        

दौड़ में हमेशा जीत हासिल करने वाले युवा ने एक प्रतियोगी की जरूरत के लिए हारी प्रतियोगिता और हार में तलाशी जीत...और पढ़ें »

व्यंग्य: रमकल्लो की पाती

Posted on:Tue, 14 Feb 2017 12:27 PM (IST)
        

चुनाव आ गए हैं, जो कुछ मिल जाए वही बहुत है। आंधी के आम हैं, जितने बटोर पाओ सो बटोर लो, नहीं तो पांच साल के लिए गए। और पढ़ें »

कहानी: पहले तुम

Posted on:Mon, 13 Feb 2017 02:54 PM (IST)
        

उत्तर अवस्था में और अधिक गहराने लगते हैं दांपत्य के ताने-बाने। जाने कौन कब साथ छोड़ जाए, यही आशंका दहलाती रहती है। और पढ़ें »

लघुकथा: पेड़ की जड़ें

Posted on:Sat, 11 Feb 2017 08:59 AM (IST)
        

दादी ने कहा 'बेटा पेड़ों की जड़ों ने रोटी रखने से या पोंछ देने से पेड़ नहीं बढ़ते वो तो इतने शक्तिशाली होते है कि धरती से अपने आप पोषण ले लेते है हमें... और पढ़ें »

लघुकथा: एक बूंद इत्र की

Posted on:Thu, 09 Feb 2017 04:32 PM (IST)
        

अगले दिन बादशाह एक मटके में इत्र भरके बैठ गया। वजीर सहित सबकी नजरें बादशाह पर थी थोड़ी देर बाद जब बादशाह को लगा कि सभी दरबारी अपनी-अपनी चर्चा में व्यस... और पढ़ें »

लघुकथा: बात समर्पण की

Posted on:Wed, 08 Feb 2017 03:34 PM (IST)
        

गुरु ने कहा इसमें कोई भी सूत्र वाली बात नहीं है बस भरोसा करना होता है। श्रद्धा चाहिए। श्रद्धा से सब कुछ संभव है। इसके लिए उसका स्मरण ही पर्याप्त है जि... और पढ़ें »

लघुकथा: श्रमजीवी मां

Posted on:Tue, 07 Feb 2017 03:06 PM (IST)
        

इतनी उम्र में मोचीगिरी का कार्य, आखिर उनकी क्या मजबूरी हो सकती है? एक दिन इन्ही सवालों के साथ उनके पास पहुंच गया था। देखा कि तन्मयता के साथ जूते की सि... और पढ़ें »

कहानी: अनुत्तरित

Posted on:Mon, 06 Feb 2017 10:57 AM (IST)
        

वय: संधिकाल के उस पार भले ही चंचलता तिरोहित हो जाती हो, वाणी छिन जाती हो परंतु किशोरी के मन में कुछ प्रश्न तितलियों की तरह मंडराते रहते हैं। अपनी तिलम... और पढ़ें »

लघुकथा: रेत का घर

Posted on:Fri, 03 Feb 2017 04:40 PM (IST)
        

महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्यों से कहा तुम मानव जीवन की कल्पना इन बच्चों की इस क्रीड़ा से कर सकते हो क्योंकि तुम्हारे बनाये शहर , राजधानियां सब ऐसे ही र... और पढ़ें »

लघुकथा: संसार की रीति और तस्वीर

Posted on:Thu, 02 Feb 2017 03:40 PM (IST)
        

इसी दुखी मन वाली स्थिति में वो चित्रकार बैठा था कि उसका एक मित्र उसके पास आया तो उसने उस से दुखी होने कारण पूछा तो चित्रकार ने उससे अपनी समस्या कही।और पढ़ें »

बसंत पंचमी की पौराणिक कथा

Posted on:Tue, 31 Jan 2017 02:58 PM (IST)
        

पृथ्वी पर कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई। और पढ़ें »

लघुकथा: गुलाब के फूल

Posted on:Sun, 29 Jan 2017 05:31 PM (IST)
        

एका एक तेनालीराम जोर से चिल्लाए- “मेरे बेटे के पास अपनी बात कहने के लिए जुबान है। वह स्‍वयं ही महाराज को बता देगा कि वह बगीचे में क्या करने आया है। और पढ़ें »

लघुकथा: मां की शिक्षा

Posted on:Fri, 27 Jan 2017 03:57 PM (IST)
        

उस धनी ने एक और दास खरीदने की इच्छा जाहिर की तो बेंगर ने एक बूढ़े की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘मालिक ! उस बूढ़े को खरीद लीजिए।’ और पढ़ें »

लघुकथा: मेंढक का रखवाला

Posted on:Wed, 25 Jan 2017 05:09 PM (IST)
        

जैसे ही सैनिकों ने पत्थर के दो टुकड़े किए, एक अविश्वश्नीय दृश्य दिखा। पत्थर के बीचो-बीच कुछ पानी जमा था और उसमेंं एक छोटा सा मेंढक रह रहा था।और पढ़ें »

लघुकथा: गुणीराम

Posted on:Tue, 24 Jan 2017 12:52 PM (IST)
        

गुणीराम अपने पिताजी के काम में हाथ बंटाता। वह पिताजी के साथ जंगल वाली खदान पर जाकर मूर्तियां बनाने में काम आने वाला पत्थर खोदकर लाता।और पढ़ें »

लघुकथा: पत्थर बने हीरे

Posted on:Thu, 19 Jan 2017 03:07 PM (IST)
        

एक विख्यात ऋषि गुरुकुल में बालकों को शिक्षा प्रदान किया करते थे। गुरुकुल में राजा महाराजाओं से लेकर साधारण बच्चे भी शिक्षा के लिए आया करते थे। और पढ़ें »

नवगीत: आए बहेलिए

Posted on:Tue, 17 Jan 2017 12:19 PM (IST)
        

आए झुंडों में बहेलिए, कहां परिंदों का कुल जाए? किस कोटर में छिपे कपोती, जाकर कहां चकोर विलापे?और पढ़ें »

कहानी: पूर्व धारणा

Posted on:Mon, 16 Jan 2017 03:50 PM (IST)
        

समाज में बहुत से ऐसे प्रगतिकामी और अच्छे लोग हैं जिनके बारे में हम बिना सोचे-समझे अपनी धारणा बना लेते हैं। प्रस्तुत है ऐसे ही एक अच्छे इंसान और बेहत... और पढ़ें »

लघुकथा: अतिथि

Posted on:Thu, 12 Jan 2017 11:53 AM (IST)
        

घर में अकेली वह, दो मासूम बेटियों के साथ और आधी रात को आ जाए कोई अजनबी बुजुर्ग, मेहमान बनकर तो क्या होता है? और पढ़ें »

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