साहित्य

कहानी: अनुत्तरित

Posted on:Mon, 06 Feb 2017 10:57 AM (IST)
        

वय: संधिकाल के उस पार भले ही चंचलता तिरोहित हो जाती हो, वाणी छिन जाती हो परंतु किशोरी के मन में कुछ प्रश्न तितलियों की तरह मंडराते रहते हैं। अपनी तिलम... और पढ़ें »

लघुकथा: रेत का घर

Posted on:Fri, 03 Feb 2017 04:40 PM (IST)
        

महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्यों से कहा तुम मानव जीवन की कल्पना इन बच्चों की इस क्रीड़ा से कर सकते हो क्योंकि तुम्हारे बनाये शहर , राजधानियां सब ऐसे ही र... और पढ़ें »

लघुकथा: संसार की रीति और तस्वीर

Posted on:Thu, 02 Feb 2017 03:40 PM (IST)
        

इसी दुखी मन वाली स्थिति में वो चित्रकार बैठा था कि उसका एक मित्र उसके पास आया तो उसने उस से दुखी होने कारण पूछा तो चित्रकार ने उससे अपनी समस्या कही।और पढ़ें »

बसंत पंचमी की पौराणिक कथा

Posted on:Tue, 31 Jan 2017 02:58 PM (IST)
        

पृथ्वी पर कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई। और पढ़ें »

लघुकथा: गुलाब के फूल

Posted on:Sun, 29 Jan 2017 05:31 PM (IST)
        

एका एक तेनालीराम जोर से चिल्लाए- “मेरे बेटे के पास अपनी बात कहने के लिए जुबान है। वह स्‍वयं ही महाराज को बता देगा कि वह बगीचे में क्या करने आया है। और पढ़ें »

लघुकथा: मां की शिक्षा

Posted on:Fri, 27 Jan 2017 03:57 PM (IST)
        

उस धनी ने एक और दास खरीदने की इच्छा जाहिर की तो बेंगर ने एक बूढ़े की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘मालिक ! उस बूढ़े को खरीद लीजिए।’ और पढ़ें »

लघुकथा: मेंढक का रखवाला

Posted on:Wed, 25 Jan 2017 05:09 PM (IST)
        

जैसे ही सैनिकों ने पत्थर के दो टुकड़े किए, एक अविश्वश्नीय दृश्य दिखा। पत्थर के बीचो-बीच कुछ पानी जमा था और उसमेंं एक छोटा सा मेंढक रह रहा था।और पढ़ें »

लघुकथा: गुणीराम

Posted on:Tue, 24 Jan 2017 12:52 PM (IST)
        

गुणीराम अपने पिताजी के काम में हाथ बंटाता। वह पिताजी के साथ जंगल वाली खदान पर जाकर मूर्तियां बनाने में काम आने वाला पत्थर खोदकर लाता।और पढ़ें »

लघुकथा: पत्थर बने हीरे

Posted on:Thu, 19 Jan 2017 03:07 PM (IST)
        

एक विख्यात ऋषि गुरुकुल में बालकों को शिक्षा प्रदान किया करते थे। गुरुकुल में राजा महाराजाओं से लेकर साधारण बच्चे भी शिक्षा के लिए आया करते थे। और पढ़ें »

नवगीत: आए बहेलिए

Posted on:Tue, 17 Jan 2017 12:19 PM (IST)
        

आए झुंडों में बहेलिए, कहां परिंदों का कुल जाए? किस कोटर में छिपे कपोती, जाकर कहां चकोर विलापे?और पढ़ें »

कहानी: पूर्व धारणा

Posted on:Mon, 16 Jan 2017 03:50 PM (IST)
        

समाज में बहुत से ऐसे प्रगतिकामी और अच्छे लोग हैं जिनके बारे में हम बिना सोचे-समझे अपनी धारणा बना लेते हैं। प्रस्तुत है ऐसे ही एक अच्छे इंसान और बेहत... और पढ़ें »

लघुकथा: अतिथि

Posted on:Thu, 12 Jan 2017 11:53 AM (IST)
        

घर में अकेली वह, दो मासूम बेटियों के साथ और आधी रात को आ जाए कोई अजनबी बुजुर्ग, मेहमान बनकर तो क्या होता है? और पढ़ें »

प्रेमचंद की लघुकथा: आत्म-संगीत

Posted on:Tue, 10 Jan 2017 04:06 PM (IST)
        

रानी मनोरमा ने आज गुरु-दीक्षा ली थी। दिन-भर दान और व्रत में व्यस्त रहने के बाद मीठी नींद की गोद में सो रही थी। अकस्मात् उसकी ऑंखें खुलीं और ये मनोहर ध... और पढ़ें »

प्रेमचंद की बाल कहानी मिट्ठू

Posted on:Mon, 09 Jan 2017 03:54 PM (IST)
        

कुछ दिन हुए लखनऊ में एक सरकस-कंपनी आयी थी। उसके पास शेर, भालू, चीता और कई तरह के और भी जानवर थे। इनके सिवा एक बंदर मिट्ठू भी था। और पढ़ें »

लघुकथा: मन का बोझ

Posted on:Fri, 06 Jan 2017 03:56 PM (IST)
        

गुरु के हाथ में कमंडल था और शिष्य के हाथ में एक झोली थी जिसे वो बड़ी सावधानी से पकड़े हुए थेऔर पढ़ें »

लघुकथा: शैतान का दाहिना हाथ

Posted on:Thu, 05 Jan 2017 04:17 PM (IST)
        

शैतान ने अपने सभी गुलामों को एक पंक्ति में खड़ा किया जिसमें से बुराई, झूठ, लोभ, अहंकार और ईष्र्या भी शामिल थे तो शैतान के भक्त उन्हें खरीदने आयेऔर पढ़ें »

लघुकथा: कद्दू की तीर्थयात्रा

Posted on:Wed, 04 Jan 2017 04:41 PM (IST)
        

मैं तुम्हें ये कद्दू देता हूँ तुम इस को साथ तीर्थ यात्रा पर ले जाओ और जिस जगह तुम स्नान करो वहां इसे स्नान करवा देना और पढ़ें »

लघुकथा: थोड़ा सोचा होता तो

Posted on:Tue, 03 Jan 2017 03:54 PM (IST)
        

तुम जो भी इस जादुई घड़े से मांगोगे ये पूरी कर देगा पर जिस दिन यह घड़ा फूट जायेगा जो कुछ भी इसने दिया है वो गायब हो जायेगा।और पढ़ें »

लघुकथा: किसी के जाने से कुछ नहीं रुकता है

Posted on:Sat, 31 Dec 2016 04:33 PM (IST)
        

एक दिन वह किसी संत के आश्रम में पहुंचा तो संत कह रहे थे की दुनिया में किसी के बिना किसी का काम नहीं रुकता है यह व्यर्थ का अभिमान है कि किसी के बिना को... और पढ़ें »

लघुकथा: भगवान का वास कहां है

Posted on:Fri, 30 Dec 2016 03:12 PM (IST)
        

भगवान के विचारों का आदर करते-करते देवताओं ने अपने-अपने विचार प्रकट किये। गणेश जी बोले आप हिमालय की चोटी पर चले जाएं। तो भगवान ने कहा वह स्थान तो मनुष्... और पढ़ें »

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