साहित्य

रंग बरसे कमेटी की बैठक

Posted on:Tue, 14 Mar 2017 12:22 PM (IST)
        

सब चाहते हैं कमेटी की होली हाइटेक हो, होलिका दहन का डिजिटल सीन रहे, मिलन के दिन डांसर बुलाई जाए मगर यह सब हो कैसे!और पढ़ें »

मर्ज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों ‘लाइक’ किया

Posted on:Tue, 14 Mar 2017 12:11 PM (IST)
        

ध्यान रहे, लाइक और कमेंट के बीच ज्यादा गैप न रहे। कोई असर न हो, तो सोते-जागते, उठते-बैठते हरी बत्ती दिखाएं। और पढ़ें »

होलियाना हनकती हरकतें और चंद हेल्दी हिदायत

Posted on:Tue, 14 Mar 2017 11:51 AM (IST)
        

होली की सुनामी होती ही ऐसी है। बड़े-बड़े बह जाया करते हैं। तन का ताप और हृदय का आंतरिक दाब बर्दाश्त कर पाना कठिन होता है। और पढ़ें »

लेखनकक्ष से: औरत अकेली नहीं

Posted on:Sun, 05 Mar 2017 03:58 PM (IST)
        

जब समाज की विषम परिस्थितियां अंतर्मन को झकझोरती हैं, तो वे बन जाती हैं ओड़िया कथाकार डॉ. प्रतिभा राय के उपन्यास की नई कड़ी। उनसे बातचीत के अंश- और पढ़ें »

एकाधिकार की निस्सारता

Posted on:Tue, 07 Mar 2017 11:02 AM (IST)
        

आदिकाल से संचित होते आ रहे ज्ञान का अक्षयकोष तो पूरी मानवता की थाती है। इस पर वैयक्तिक एकाधिकार की अवधारणा और आग्रह को कूप-मंडूकता नहीं तो और क्या कहे... और पढ़ें »

लघुकथा: शक का घेरा

Posted on:Tue, 07 Mar 2017 10:46 AM (IST)
        

मौका मिलते ही मुझे घूरने लगता है। पत्नी नहाने जाती है तो वह किसी बहाने रसोईघर में घुस आता है और मेरे इर्द-गिर्द मंडराने की फिराक में रहता है। और पढ़ें »

व्यंग्य: एंड्रायड फोन और मेरी फ्रीज्ड निजता

Posted on:Tue, 07 Mar 2017 10:20 AM (IST)
        

हॉट केक की तरह आनन-फानन में बंटने और चखने के लिए तैयार माल जैसी बन गई। बस स्टॉप पर बिकने और चखने के लिए मुμत में बंटने वाले पाचक चूरन जैसी कुछ।और पढ़ें »

नवगीत:शुष्क पत्तों की तरह

Posted on:Tue, 07 Mar 2017 10:16 AM (IST)
        

इक टके का स्वप्न देकर छीन ली है जान छीनकर संघर्षऔर पढ़ें »

पुस्तक चर्चा: विविध वर्णी दोहे

Posted on:Tue, 07 Mar 2017 10:05 AM (IST)
        

रचनाकार की अनुभूति व्यापक और सार्वभौमिक है इसीलिए परंपरागत छंद में भी वह आधुनिक बोध को वाणी दे सके।और पढ़ें »

बुक रिव्‍यू: वो जो खुद विवाद है

Posted on:Sun, 05 Mar 2017 03:41 PM (IST)
        

हेट किलिंग के दौर में लौट चुके अमेरिका का रंग अब सफेद है क्योंकि व्हाइट हाउस में पहुंच चुके हैं डोनाल्ड ट्रंप। और पढ़ें »

कहानी: उतरा अहंकार का नशा

Posted on:Sun, 05 Mar 2017 03:33 PM (IST)
        

मेरी कहानी मेरा जागरण के तहत इस सप्ताह संपादक मंडल द्वारा चुनी गई दो श्रेष्ठ कहानियों में से एक...और पढ़ें »

कहानी: धैर्य का पुरस्‍कार

Posted on:Sun, 05 Mar 2017 03:22 PM (IST)
        

मेरी कहानी मेरा जागरण के तहत इस सप्ताह संपादक मंडल द्वारा चुनी गई दो श्रेष्ठ कहानियों में से एक...और पढ़ें »

कहानी: दोपहर का भोजन

Posted on:Fri, 03 Mar 2017 02:41 PM (IST)
        

अचानक उसे मालूम हुआ कि बहुत देर से उसे प्यास नहीं लगी हैं। वह मतवाले की तरह उठी ओर गगरे से लोटा-भर पानी लेकर गट-गट चढ़ा गई।और पढ़ें »

लघुकथा: ट्यूशनखोर

Posted on:Mon, 27 Feb 2017 01:44 PM (IST)
        

ऐसा नहीं है कि उसे पैसे की कोई ज्यादा कमी हो। उसके पिताजी की मृत्यु भले ही 40 की उम्र में हो गई हो लेकिन वो उसके लिए एक अदद मकान और कुछ जमा पूंजी भी छ... और पढ़ें »

टूटे पुल से

Posted on:Mon, 27 Feb 2017 01:40 PM (IST)
        

सेमल के फूल में अब तो उड़ती हुई रुई सीऔर पढ़ें »

काव्यात्मक खामोशी के वाचाल कवि

Posted on:Mon, 27 Feb 2017 01:33 PM (IST)
        

वह बाहर से खामोश और भीतर से वाचाल किस्म के कवि हैं। उन्हें सुनने के लिए पास जाना जरूरी। व्यक्तित्व की दहलीज पर खामोशी की महीन झालरें लटकी हुईं दिखेंगी... और पढ़ें »

उर्दू भी हमारी हिंदी भी हमारी!

Posted on:Mon, 27 Feb 2017 01:16 PM (IST)
        

एक समय जब न तो उर्दू थी और न ही हिंदी थी तो उस बोली को ‘हिंदवी’ कहा जाता था। इसे फिर ‘रेख्ता’ का नाम भी दिया गया।और पढ़ें »

हिंदी को बनाया मन की भाषा

Posted on:Sat, 25 Feb 2017 11:58 AM (IST)
        

शहर के पालम विहार में रहने वाली लेखिका चंद्रकांता आधुनिक महिला साहित्यकारों की फेहरिस्त में एक जाना पहचाना नाम है।और पढ़ें »

पारखी नजर और गहरी संवेदना की पूंजी है साहित्य

Posted on:Sat, 25 Feb 2017 11:44 AM (IST)
        

उनकी कहानियों में स्त्री-पुरुष के संबंधों को प्रमुखता दी जाती है। उनके साहित्य में मुंशी प्रेमचंद्र के साहित्य की तरह ही पात्रों के स्वर सुनाई देते है... और पढ़ें »

लघुकथा: संघर्ष के बीज

Posted on:Sat, 21 Jan 2017 04:18 PM (IST)
        

एक दिन किसान दुखी होकर मंदिर में जा पहुंचा और भगवान की मूर्ति के आगे खड़ा हो कर कहने लगा भगवान बेशक आप परमात्मा है लेकिन फिर भी लगता है आपको खेती बाड़... और पढ़ें »

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