बेंगलूर में कोडरमा के 11 लड़कों को कराया गया मुक्त

Publish Date:Fri, 11 Apr 2014 01:05 AM (IST) | Updated Date:Fri, 11 Apr 2014 01:05 AM (IST)

रांची : बेंगलूर के कोल्स पार्क इलाके में पानी-पूरी स्टॉल पर काम कर रहे झारखंड के 11 लड़कों को वहां के प्रशासन ने बुधवार को मुक्त कराया। ये सभी लड़के कोडरमा जिले के हैं। उनकी उम्र 12 से 20 साल के बीच है। कई महीने पहले इन्हें बहला-फुसला कर कोडरमा के ही दो व्यक्ति बेंगलूर ले गए थे। उसके एवज में इन लड़कों के अभिभावकों को कुछ पैसे भी दिए गए थे। पिछले कई महीने से ये कोल्स पार्क इलाके में सड़क किनारे पानी-पूरी बेच रहे थे। उसमें से कोई पानी लाने का काम करता था, तो कोई साफ-सफाई का। इन्हें दिन में करीब 10 से 12 घंटे काम करना पड़ रहा था। इंटरनेशनल जस्टिस मिशन नामक संस्था की नजर इन लड़कों पर पड़ी। उन्होंने इसकी सूचना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और बेंगलूर प्रशासन को दी। बुधवार की सुबह बेंगलूर प्रशासन की टीम ने छापेमारी की। पाया कि सभी 11 बच्चे बंधुआ मजदूर की तरह कार्य कर रहे हैं। इन्हें रहने के लिए एक छोटा-सा कमरा दिया गया था, वह भी बिना किसी सुविधा के। दिन भर कार्य करने के बाद ये लड़के जमीन पर ही सो जाया करते थे। उन्हें मुक्त कराकर वहां के भारथी नाथ पुलिस स्टेशन ले जाया गया और प्राथमिकी दर्ज की गई। इन लड़कों को जो व्यक्ति वहां ले गया था, उसकी खोजबीन शुरू कर दी गई है। बच्चों को बाल विकास समिति को सौंप दिया गया है। कुछ दिनों में इन लड़कों को उनके परिजनों के पास भेज दिया जाएगा।

इंटरनेशनल जस्टिस मिशन संस्था के निदेशक सैम जॉर्ज ने बताया कि बेंगलूर में छोटे शहरों से आने वाले लड़कों की संख्या काफी बढ़ गई है। इसमें झारखंड से आने वाले बच्चे सबसे ज्यादा रहते हैं। पहले तो उन्हें बहला-फुसला कर यहां लाया जाता है, उसके बाद उनसे बंधुआ मजदूर की तरह काम करवाया जाता है। संस्था की कोशिश है कि ऐसे बच्चों को मुक्त करवाया जाए।

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