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स्कूल 30 हजार, बच्चे लाखों...सुरक्षा रामभरोसे

Publish Date:Wed, 13 Sep 2017 02:39 PM (IST) | Updated Date:Wed, 13 Sep 2017 02:39 PM (IST)
स्कूल 30 हजार, बच्चे लाखों...सुरक्षा रामभरोसेस्कूल 30 हजार, बच्चे लाखों...सुरक्षा रामभरोसे
बच्चों की सुरक्षा को न तो जिला प्रशासन और न ही पुलिस प्रशासन संभाल रहा है। ऐसे में उनकी सुरक्षा रामभरोसे ही है।

शिमला, राज्य ब्यूरो। जिलास्तर पर प्रशासन व पुलिस यदि अपना पल्ला झाड़ रहे हैं तो हिमाचल के 30 हजार स्कूलों में पढऩे वाले लाखों बच्चों को सुरक्षा आखिर कौन मुहैया करवाएगा? बच्चों को पैदल ही स्कूल आने को कहा जा रहा है जबकि ऐसा कहने वाले अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी गाडिय़ों में स्कूल भेज रहे हैं। 

 

बच्चों की सुरक्षा को न तो जिला प्रशासन और न ही पुलिस प्रशासन संभाल रहा है। ऐसे में उनकी सुरक्षा  रामभरोसे ही है। यही कारण है कि कुछ समय पहले अभिभावकों को अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रदेश पुलिस महानिदेशक से गुहार लगानी पड़ी है। जिलास्तर पर होने वाली कई बैठकों के बाद भी हल नहीं निकल रहा है। प्रदेश में सरकारी व निजी क्षेत्र में करीब 30 हजार स्कूल हैं। 

 

हर स्कूल के बाहर एक सुरक्षा कर्मी तैनात करना हो तो 30 हजार सुरक्षा कर्मी इसके लिए चाहिएं। प्रदेश में 18 हजार पुलिस कर्मी हैं। इनमें से चार हजार पुलिस जवान बटालियनों में और डेढ़ हजार के करीब मंत्रियों व अधिकारियों की ड्यूटी कर रहे हैं।

 

इसके अलावा आठ हजार गृहरक्षकों में से केवल चार हजार गृहरक्षकों से ही रोटेशन में सेवाएं ली जाती हैं जो विभिन्न सरकारी कार्यालयों में भी सुरक्षा का जिम्मा संभाले हुए हैं। अभिभावकों में बच्चों की सुरक्षा की चिंता जायज है। जब अपने सारे काम छोड़कर आठवीं व नौवीं कक्षा में पढऩे वाले अपने बच्चों को भी पकड़-पकड़ कर माता-पिता को स्कूल छोडऩे के लिए विवश होना पड़े तो यह खतरे की घंटी है। हरियाणा के गुरुग्राम में स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल में बच्चे प्रद्युम्न ठाकुर की मौत के बाद सीबीएसई सहित अन्य शिक्षा बोर्ड व प्रशासन ने नए निर्देशों को स्कूल प्रबंधन के लिए जारी तो कर दिया है लेकिन बच्चों की

सुरक्षा को कौन जांचेगा, यह अहम प्रश्न है।

 

कई स्कूली टैक्सियों के चालक नशे के आदी कई नशेड़ी वाहन चालकों ने स्कूली बच्चों को लाने व ले जाने का जिम्मा संभाला हुआ है। जिन टैक्सियों में पांच व्यक्तियों को ही बिठाया जा सकता है, उनमें अपने मुनाफे

के लिए 10 से 15 बच्चों को सामान की तरह ढोया जा रहा हैं। स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होने के कारण इस संबध में शिकायत प्रदेश पुलिस महानिदेशक से की गई है। पुलिस की क्राइम फाइल में दर्ज होने वाले मामलों में 30 से 40 फीसद सड़क हादसे नशे की हालत में होते हैं।

 

पुलिस के पास सिर्फ 171 एल्को सेंसर

कई लोगों द्वारा शराब पीकर वाहन चलाने के बावजूद उनकी जांच के लिए प्रदेश पुलिस के पास मात्र 171 एल्को सेंसर हैं। इन एल्को सेंसर को चलाने वाले प्रशिक्षित कर्मियों का भी अभाव है। ऐसे में शराब पीकर बच्चों को स्कूल लाने व ले जाने वालों की जांच कौन करेगा। प्रदेश में हर थाने के पास एक से दो ही एल्को सेंसर हैं जबकि एक थाने के अधीन दो से तीन पुलिस चौकियां अलग हैं। नशेडिय़ों की जांच की कोई व्यवस्था नहीं है।

 

जारी होंगे निर्देश

जिला पुलिस अधीक्षक अपने स्तर पर बच्चों की सुरक्षा और अन्य व्यवस्था को देख रहे हैं। यदि उनके स्तर पर समस्या का हल नहीं हो रहा है तो आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।

-सोमेश गोयल, प्रदेश पुलिस महानिदेशक

 

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Web Title:School 30 thousand millions of children(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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