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बात-बात पर हंगामा

Publish Date:Wed, 09 Aug 2017 05:50 AM (IST) | Updated Date:Wed, 09 Aug 2017 06:56 AM (IST)
बात-बात पर हंगामाबात-बात पर हंगामा
लोकसभा में राहुल गांधी की सुरक्षा को लेकर सदन को बाधित किया गया।

बीते दिनों गुजरात गए राहुल गांधी की गाड़ी पर हमले के मामले में लोकसभा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह के इस सवाल पर कांग्रेस के हंगामे का औचित्य समझना कठिन है कि आखिर कांग्रेस उपाध्यक्ष सुरक्षा संबंधी प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं करते? राजनाथ सिंह ने न केवल यह स्पष्ट किया कि गुजरात दौरे के समय राहुल गांधी ने बुलेट प्रूफ गाड़ी का इस्तेमाल करने से इन्कार किया, बल्कि एसपीजी के अधिकारियों की बात भी नहीं मानी। उन्होंने यह भी बताया कि राहुल गांधी विदेश दौरों के समय भी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करते हैं। उनकी मानें तो वह बीते दो साल में कम से कम सौ बार सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर चुके हैं। पता नहीं ये उल्लंघन किस तरह के थे, लेकिन सबको पता है कि अभी कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में गए राहुल किस तरह अपने एक कार्यकर्ता की बिना नंबर की मोटर साइकिल पर बैठकर किसानों के बीच पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। इसके पहले वह ग्रेटर नोएडा के एक गांव में भी इसी तरह पहुंचे थे और उसके पहले राजस्थान में भी। क्या एसपीजी का सुरक्षा संबंधी प्रोटोकॉल उन्हें यह सब करने की इजाजत देता है? राहुल कई बार प्रतिबंध के बावजूद हिंसा और तनाव ग्रस्त इलाके में पहुंचे हैं और इस क्रम में उन्होंने अपनी सुरक्षा की अनदेखी की है। कम से कम उन्हें तो यह अच्छे से पता होना चाहिए कि सुरक्षा में लापरवाही कितनी घातक हो सकती है? यह सही है कि किसी भी नेता के लिए जनता के बीच जाना आवश्यक होता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वह सुरक्षा संबंधी नियमों की अनदेखी करते हुए ऐसा करे। यह समझना कठिन है कि जब गृहमंत्री ने यह साफ कर दिया था कि गुजरात में राहुल की गाड़ी पर पथराव की जांच की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दोषियों पर कार्रवाई हो तब फिर कांग्र्रेस को सदन की कार्यवाही बाधित करने की क्या जरूरत थी?
जैसे लोकसभा में राहुल गांधी की सुरक्षा को लेकर सदन को बाधित किया गया वैसे ही राज्यसभा में पांच सौ रुपये के अलग-अलग तरह के नोट छापने के मसले को लेकर किया गया। इस तरह दोनों ही सदनों की कार्यवाही हंगामें की भेंट चढ़ गई। यह अजीब है कि विपक्ष अलग-अलग तरह के नोट छापने के मामले में सीधे इस नतीजे पर पहुंच गया कि यह सदी का सबसे बड़ा घोटाला है। इस मसले को जिस तरह उठाया गया उससे यही लगता है कि इरादा किसी कथित विसंगति को ओर ध्यान आकर्षित करने का कम, हंगामा खड़ा करने का अधिक था। यह तय है कि जल्द ही सरकार इस मसले पर स्थिति स्पष्ट करेगी, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि यह पहली बार नहीं जब एक ही कीमत के सिक्कों और नोटों में अंतर हो। ऐसा पहले भी हो चुका है और अभी भी थोड़े-बहुत अंतर वाले सिक्के एवं नोट चलन में हैं। यह नई बात नहीं कि किसी मामूली मसले पर संसद की कार्यवाही बाधित की गई हो। अब ऐसा आए दिन होता है। नि:संदेह इस सबसे सुर्खियां बनती हैं और हल्ला-हंगामा मचाने वाले संसद सदस्य चर्चा में भी आते हैं, लेकिन संसद केवल इसलिए नहीं है।

[ मुख्य संपादकीय ]

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Web Title:Ruckus on talk matter(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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