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बेलगाम बयानबाजी

Publish Date:Monday,Apr 21,2014 05:08:02 AM | Updated Date:Monday,Apr 21,2014 04:59:23 AM

बिहार में नरेंद्र मोदी के प्रबल समर्थक माने जाने वाले भाजपा प्रत्याशी गिरिराज सिंह ने यह बयान देकर वस्तुत: मोदी का ही नुकसान किया है कि उनका विरोध करने वाले पाकिस्तान चले जाएं। बिहार सरकार में मंत्री रह चुके गिरिराज सिंह से ऐसे बयान की अपेक्षा बिल्कुल भी नहीं थी। उन्होंने यह बयान देकर न केवल अपना, बल्कि भाजपा का भी अहित किया है। यह आपत्तिाजनक बयान देकर उन्होंने उन आरोपों को बल प्रदान करने का ही काम किया है जिनके तहत भाजपा विरोधी दल यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि वह समाज का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है। यह अच्छी बात है कि भाजपा के नेताओं ने गिरिराज सिंह के इस बयान से न केवल किनारा किया, बल्कि उन्हें फटकार भी लगाई, लेकिन यह कहना कठिन है कि उन्हें अपनी भूल का अहसास होगा या नहीं, क्योंकि यह कहा जा रहा है कि वह अभी भी अपने बयान पर कायम हैं। इस स्थिति में यह सर्वथा उचित है कि निर्वाचन आयोग उनके इस बयान का संज्ञान ले। जो भी हो, यह निराशाजनक है कि गिरिराज सिंह ने ऐसा बयान तब दिया जब खुद नरेंद्र मोदी की ओर से साफ तौर पर यह कहा जा चुका था कि उन्हें पराजय मंजूर होगी, लेकिन धार्मिक आधार पर वोट नहीं। नरेंद्र मोदी की ओर से साफ तौर पर ऐसा कहे जाने के बावजूद भाजपा नेताओं की ओर से आपत्तिाजनक अथवा समाज का ध्रुवीकरण करने वाले बयान देने से यही जाहिर होता है कि नेतृत्व के स्तर पर जो चाहा जा रहा है वह जमीनी स्तर पर नहीं पहुंच पा रहा है।

भाजपा को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके किसी भी नेता की ओर से ऐसा कुछ भी न कहा जाए जिससे जनता के बीच यह संदेश जाए कि वह वोटों के लिए ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है। यह इसलिए आवंश्यक है, क्योंकि विरोधी दल यही साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि भाजपा समाज को बांटने का काम कर रही है। यह निराशाजनक है कि भड़काऊ बयानों पर निर्वाचन आयोग के सख्त रवैये के बावजूद उकसावे वाली बयानबाजी पर कोई लगाम लगती नहीं दिख रही है। शायद ही कोई दिन ऐसा होता है जब किसी न किसी नेता की ओर से उकसावे वाले बयान न दिए जाते हों। ऐसा लगता है कि कुछ नेता तो इसमें महारत हासिल कर चुके हैं। इनमें प्रमुख हैं-कांग्रेस के बेनी प्रसाद वर्मा और समाजवादी पार्टी के आजम खान। जहां आजम खान अपनी भूल स्वीकार करने के बजाय चुनाव आयोग की ही आलोचना कर रहे हैं वहीं बेनी प्रसाद वर्मा के रवैये से तो लगता है कि वह खुद को नियम-कानून से परे मानते हैं। विडंबना यह है कि कांग्रेस नेतृत्व भी उनके समक्ष असहाय नजर आ रहा है। बेनी प्रसाद वर्मा जिस तरह एक के बाद एक घोर आपत्तिाजनक बयान देने में लगे हुए हैं और इस क्रम में उन्होंने जिस तरह यह कहा कि नरेंद्र मोदी कश्मीर पाकिस्तान के हाथों में देना चाहते हैं उससे तो ऐसा लगता है कि कांग्रेस ने उन्हें खुली छूट प्रदान कर दी है। कांग्रेस को निर्वाचन आयोग के समक्ष गिरिराज सिंह की शिकायत करने के साथ-साथ यह भी देखना चाहिए कि उसके अपने नेता किस तरह भड़काऊ और अमर्यादित बयान देने में लगे हैं।

[मुख्य संपादकीय]

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Web Title:Uncontrol Statements

(Hindi news from Dainik Jagran, editorialnazariya Desk)

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