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स्मार्ट पहल

Publish Date:Fri, 19 May 2017 04:19 AM (IST) | Updated Date:Fri, 19 May 2017 04:19 AM (IST)
स्मार्ट पहलस्मार्ट पहल
सौर, परमाणु ऊर्जा से बिजली की कमी को दूर करने के प्रयास हो रहे हैं। केंद्र से लेकर राज्य सरकारें तक इस पर जोर दे रही हैं।

 इस समय वायु व पर्यावरण प्रदूषण, स्वच्छता को लेकर पूरे भारत में बहस छिड़ी हुई है। ताप विद्युत केंद्र से निकलने वाले धुआं से हवा में प्रदूषण बढ़ रहा है। वैसे तो वायु प्रदूषण के और भी कई कारक हैं। इसीलिए वैकल्पिक ग्रीन ऊर्जा पर जोर दिया जा रहा है। सौर, परमाणु ऊर्जा से बिजली की कमी को दूर करने के प्रयास हो रहे हैं। केंद्र से लेकर राज्य सरकारें तक इस पर जोर दे रही हैं। अभी बुधवार को ही केंद्रीय कैबिनेट ने देश में 10 नए परमाणु रिएक्टर लगाने पर मुहर लगाई है। इन सबके बीच हावड़ा के शिवपुर स्थित भारतीय अभियांत्रिकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइईएसटी) ने देश की पहली स्मार्ट ग्रिड परियोजना को सफलतापूर्वक स्थापित कर लिया है जो ऊर्जा के नवीकरणीय स्नोतों से विद्युत उत्पन्न करेगी। यहां एक साथ सब्जियों के कचरे, सौर और हवा से बिजली होगी। इसीलिए आइआइईएसटी के विज्ञानिकों ने इसका नाम स्मार्ट ग्रिड परियोजना रखा है। सही में यह स्मार्ट पहल है। इन तीनों ही स्नोतों से 30-35 किलोवॉट बिजली के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रयोग सफल रहने पर निश्चित ही देश में बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में बड़ी छलांग हो सकती है। शुक्रवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से परियोजना का उद्घाटन करेंगे। इस पहल से आइआइईएसटी बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएगा। संस्थान के निदेशक अजय कुमार रॉय का कहना है कि स्मार्ट ग्रिड सौर, हवा और सब्जियों के कचरे जैसे संसाधनों से बिजली उत्पन्न करेगी। यह देश में अपनी तरह की पहली ग्रिड है। सौर ऊर्जा से उत्पन्न की जाने वाली बिजली सूर्य के प्रकाश की उपलब्धता पर निर्भर करती है, जबकि पवन ऊर्जा कालबैसाखी और उष्णकटिबंधीय तूफान के दौरान उत्पन्न होगी। बायोगैस से बनने वाली बिजली परिसर के रसोई और आसपास के बाजारों से एकत्रित सब्जियों के कचरे से बनाई जाएगी। सौर से 10-15, बॉयो गैस से 15 और तूफान से 3-4 किलोवॉट उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसका बड़ा ही लाभ होगा। क्योंकि, सबसे अधिक गंदगी सब्जी बाजार में रहती है। इस योजना से सफाई भी हो जाएगी और कचरे का सही उपयोग भी होगा। केंद्र व राज्य सरकार को चाहिए कि आइआइईएसटी से सबक लेते हुए इस तरह की तकनीक को बढ़ावा दे। इससे हमारे देश में बिजली की कमी तो दूर होगी ही, पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा। साथ ही स्वच्छता व ताप विद्युत केंद्रों से निकलने वाले धुएं से बचा जा सकेगा।

[ स्थानीय संपादकीय : पश्चिम बंगाल ]

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Web Title:Smart Initiative(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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