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अफस्पा पर न हो राजनीति

Publish Date:Mon, 20 Mar 2017 03:18 AM (IST) | Updated Date:Mon, 20 Mar 2017 03:24 AM (IST)
अफस्पा पर न हो राजनीतिअफस्पा पर न हो राजनीति
दो संसदीय सीटों पर उपचुनाव से ठीक पहले कश्मीर केंद्रित राजनीतिक दल अफस्पा को भुनाने के प्रयास में जुट गए हैं।

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दो संसदीय सीटों पर उपचुनाव से ठीक पहले कश्मीर केंद्रित राजनीतिक दल अफस्पा को भुनाने के प्रयास में जुट गए हैं, जबकि उन्हें कश्मीर के हालात को सुधारने पर एकजुट होना चाहिए
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संसदीय उपचुनावों से ठीक पहले एक बार फिर से राज्य में आर्म्ड फोर्सिस स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) पर राजनीति होना स्वभाविक है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिससे कश्मीर के लोग सीधे जुड़े हुए हैं और कश्मीर केंद्रित राजनीतिक दल इसे हर बार विधानसभा व संसदीय चुनावों में भुनाने का प्रयास करते हैं। कश्मीर के हालात खराब होने के बाद स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार से राज्य के कई भागों में अफस्पा लगाया था। अस्सी के दशक के अंत में शुरू हुए आतंकवाद के दौर के बाद बेशक अभी हालात में बदलाव आया था लेकिन जिस प्रकार से आए दिन कश्मीर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ हो रही है, उससे सहजता से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अभी हालात सामान्य नहीं है। सोचनीय विषय यह है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता स्वयं मान रहे हैं कि अभी कश्मीर के हालात अफस्पा हटाने के अनुकूल नहीं हैं। फिर आए दिन इस मुद्दे को तूल देने का क्या औचित्य है? यह बात किसी से नहीं छुपी है कि राज्य के हालात खराब होने के कारण ही संसदीय उपचुनाव कई बार टले। स्थानीय निकाय व पंचायत चुनाव भी इसी कारण नहीं हो पा रहे हैं। बीते साल आतंकवादी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में पांच महीनों तक चले ङ्क्षहसक प्रदर्शनों को शायद ही राज्य का कोई भी व्यक्ति भूल पाया हो। इन प्रदर्शनों में एक सौ से अधिक लोगों की जान चली गई, जबकि कई स्कूली इमारतों को शरारती तत्वों ने जला दिया। हालात इस कदर खराब हो गए थे कि कश्मीर में पांच महीने तक स्कूल बंद रहे और परीक्षा में भी उन्हें ओपन च्वाइस देनी पड़ी थी। यह सही है कि इस समय स्थिति में सुधार हुआ हुआ है लेकिन आए दिन जिस प्रकार से पाकिस्तान तथा अलगाववादी नेता कश्मीर के हालात को खराब करने की साजिश रचते रहते हैं, उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अभी सब कुछ सामान्य नहीं है। केंद्र व राज्य सरकार को चाहिए कि वे कश्मीर के हालात को सुधारने के लिए प्रभावी कदम उठाए। केंद्र सरकार की अफस्पा पर स्थिति स्पष्ट है। हालात सामान्य होने के बाद ही इसे हटाने पर विचार संभव है। कश्मीर केंद्रित राजनीतिक दलों को भी चाहिए कि वे इस मुद्दे पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के स्थान पर घाटी के हालात को देखें और राजनीति करने से परहेज करें।

[ स्थानीय संपादकीय : जम्मू-कश्मीर ]

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Web Title:Do not Politics on Afspa(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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