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माकपा में मंथन

Publish Date:Tue, 21 Mar 2017 03:00 AM (IST) | Updated Date:Tue, 21 Mar 2017 03:04 AM (IST)
माकपा में मंथनमाकपा में मंथन
माकपा अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। सांगठनिक स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। माकपा के जनाधार में गिरावट जारी है।

माकपा अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव से पहले और विधानसभा चुनाव के बाद कोलकाता में दो-दो बार माकपा का प्लेनम (विशेष सम्मेलन) हुआ, लेकिन सांगठनिक स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। वाममोर्चा की अगुवाई करने वाली माकपा राज्य में 34 वर्षों तक सत्ता में रही। पहली बार पार्टी को सत्ता से बाहर रहकर एक साथ कई चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। 2011 में सत्ता से हटने के बाद माकपा के जनाधार में गिरावट जारी है। विधानसभा चुनाव हो या उप चुना अथवा नगरपालिका या नगर निगम का चुनाव, सभी स्तर पर माकपा को मुंह की खानी पड़ रही है। हालांकि विभिन्न स्तर से माकपा इसकी गहन समीक्षा कर रही है और संकट से बाहर निकलने का प्रयास कर रही है। राज्यव्यापी सभी पार्टी इकाइयों में एक साथ अध्ययन केंद्र आयोजित करना और उसमें निचले स्तर के पार्टी सदस्यों और पार्टी कर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना इसी प्रयास का एक हिस्सा है।
माकपा राज्य कमेटी की ओर से रविवार को आयोजित राज्यव्यापी अध्ययन केंद्र में निचले स्तर से लेकर वरिष्ठ कामरेडों ने पार्टी की सांगठनिक स्थिति मजबूत करने के लिए गहन चिंतन किया। राज्य में लगभग 20 हजार पार्टी शाखाओं में कामरेडों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। माकपा के राज्य सचिव सूर्यकांत मिश्रा की पहल पर पहली बार इस तरह तरह का अध्ययन केंद्र आयोजित किया गया। वाममोर्चा के पिछले 40 वर्षो के शासन में कामरेड कभी अध्ययन केंद्र में मंथन के लिए एकत्र नहीं हुए। पहली बार अध्ययन केंद्र का आयोजन किया गया जिसमें पार्टी के कार्यक्रम, आदर्श और सिद्धांत पर कामरेडों ने गहन मंथन किया। दुनिया में कम्युनिस्ट आंदोलन को मजबूत करने में अध्ययन केंद्र की अहम भूमिका रही है। नई पीढ़ी के कामरेडों के लिए पार्टी की कक्षाएं लगाने की व्यवस्था होने के बावजूद एक साथ सभी पार्टी शाखाओं में अध्ययन केंद्र का आयोजन प्रचलन में नहीं था। पहली बार जब इसे शुरू किया गया है तो जाहिर है माकपा अपनी सांगठनिक स्थिति मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। 20 हजार शाखाओं के साथ आज भी माकपा राज्य में सबसे बड़े नेटवर्क वाली पार्टी है। पार्टी ने निचले स्तर के कामरेडों में भी बौद्धिक क्षमता का विकास करने की पहल की है तो इसे एक अच्छा प्रयास ही माना जाएगा।
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(हाईलाइटर:: 2011 में सत्ता से हटने के बाद माकपा के जनाधार में गिरावट जारी है। विधानसभा चुनाव हो या उपचुनाव अथवा नगरपालिका या निगम का चुनाव, सभी स्तर पर माकपा को मुंह की खानी पड़ रही है।)

[ स्थानीय संपादकीय : पश्चिम बंगाल ]

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