PreviousNext

सच्ची प्रार्थना

Publish Date:Mon, 05 Oct 2015 01:10 AM (IST) | Updated Date:Mon, 05 Oct 2015 01:12 AM (IST)
सच्ची प्रार्थना
प्रार्थना का तात्पर्य है-परमात्मा के करीब होना। मनुष्य को आंतरिक बल प्रदान करने का कार्य प्रार्थना करती है। प्रार्थना यदि मन से की जाए तो परमेश्वर हमारी पुकार अवश्य सुनते हैं, परं

प्रार्थना का तात्पर्य है-परमात्मा के करीब होना। मनुष्य को आंतरिक बल प्रदान करने का कार्य प्रार्थना करती है। प्रार्थना यदि मन से की जाए तो परमेश्वर हमारी पुकार अवश्य सुनते हैं, परंतु अक्सर हमारी प्रार्थना तब अपना पूरा असर नहीं डाल पाती, जब उसमें भाव और पूर्ण निष्ठा की कमी होती है। प्रार्थना में भाषा का उतना महत्व नहीं है, जितना भाव का। प्रार्थना के साथ-साथ अपने कर्मों का लेखा-जोखा भी अवश्य करते रहें। तब जाकर बात बनती है। प्रार्थना में मन-मस्तिष्क की एकाग्रता के साथ-साथ समर्पण का भी विशेष महत्व है। सच्ची प्रार्थना वे ही कर पाते हैं जिनका हृदय मंदिर पवित्र होता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि परमात्मा का निवास निर्मल मन में ही होता है।

प्रार्थना विनम्रता का प्रतीक है। वेदों में अनेक प्रार्थनाएं निहित हैं। जब भी ईश्वर की चरण-शरण में जाएं, उससे अभयता मांगें। मात्र शब्दों का खेल न खेलें, क्योंकि वह हमारे मन के भाव-कुभाव को भली-भांति जानता और समझता है। प्रार्थना वस्तुत: प्रेमोपासना की सर्वोत्तम विधि है। भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की प्रार्थना सुनकर चीरहरण के समय उनकी लाज रखी। वे भक्तों की पुकार सुनकर दौड़े-दौड़े चले आते हैं। जो सच्चा भक्त है, उसकी प्रार्थना सदैव यही रहती है कि हे प्रभू मैं आपके ध्यान में हमेशा बना रहूं। आपकी कृपा हमेशा चाहिए, क्योंकि आप कृपा साध्य हैं, पुरुषार्थ साध्य नहीं। आप इंद्रियातीत हैं। कमी हमारी पुकार में है, आपके देने में नहीं। जब जीव का यह भाव उस ब्रह्म के प्रति होता है, तो उसे वह सब कुछ मिलता है, जिसे वह चाहता है। प्रार्थना के समय विचारों में गिरावट न आने दें। अच्छे विचारों से ही प्रार्थना को बल मिलता है। इस नश्वर संसार में जो व्यक्ति धर्म का आचरण करते हुए नित्य प्रभु की प्रार्थना करता है, उसे अथाह सुख की अनुभूति होती है। प्रार्थना अंतर्मन की पुकार है। एक ही परम सत्य परमेश्वर को श्रद्धालु अनेक नामों से अपने हृदय मंदिर में बसाकर प्रार्थना करते हैं। जब भी कुछ याचना करनी हो, तो हाथ उस एक मालिक के सामने ही फैलाएं। ऐसा इसलिए, क्योंकि उसकी प्रार्थना से जीवन पवित्र होता है। उसकी कृपा से हमारे पाप, हमारी दृष्प्रवृत्तियां नष्ट होती हैं।

[आचार्य अनिल वत्स]

मोबाइल पर भी अपनी पसंदीदा खबरें और मैच के Live स्कोर पाने के लिए जाएं m.jagran.com पर
Web Title:True prayer(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

कमेंट करें

शर्मनाक संकीर्णतानेतृत्व का इम्तिहान
यह भी देखें