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मुद्दा: विस्थापन की विभीषिका

Publish Date:Sun, 10 Jun 2012 01:25 PM (IST) | Updated Date:Sun, 10 Jun 2012 01:28 PM (IST)
मुद्दा: विस्थापन की विभीषिका

विकास: फील गुड कराने वाला शब्द। आंकड़ों की खुशनुमा तस्वीर उकेरने वाली पहेली। अर्थशास्त्रियों एवं नीति नियंताओं द्वारा गरीबों को चकाचौंध कर देने वाला तिलिस्म। विकास खास करके भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन शर्त है कि उसे समावेशी और चहुंमुखी होना चाहिए। एकतरफा विकास समाज मे विद्वेष फैलाता है। विकास की चमचमाहट में अक्सर एक खास वर्ग का हित अनदेखा हो जाता है। जिसके शोषण से इस विकास की बुनियाद रखी गई होती है। उसी का घर उजड़ जाता है। विकास की कीमत पर विस्थापित होने वाले लोगों की संख्या में हम दुनिया में अव्वल हैं।

विस्थापन: वर्किग ग्रुप ऑन ह्यूमन राइट्स इन इंडिया एंड यूएन [डब्ल्यूजीएचआर] की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक आजादी के बाद से विकास परियोजनाओं के चलते देश में छह से साढ़े छह करोड़ लोगों को विस्थापन झेलने पर मजबूर होना पड़ा है। यानी औसतन हर साल दस लाख लोगों को विस्थापन के रूप में विकास की कीमत चुकानी पड़ी है। इनके विस्थापन से एक खास वर्ग को तो लाभ मिला, लेकिन घर-बार उजड़ जाने से इनकी हालत और दयनीय होती गई। ऐसे एकतरफा विकास तो देश को नि:संदेह पीछे ले जाने वाले साबित हो सकते हैं। ऐसे में विस्थापन की इतनी बड़ी कीमत चुकाकर हासिल होने वाला विकास? हम सबके लिए बड़ा मुद्दा है।

समस्या

विस्थापन या दर-बदर एक ऐसी सामाजिक समस्या है जिसमें कुछ खास कारणों के चलते समुदायों और लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने को विवश होना पड़ता है।

भयावह

डब्ल्यूजीएचआर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक विकास परियोजनाओं के चलते दुनिया में सर्वाधिक विस्थापित होने वाले लोग भारत में हैं।

6-6.5 करोड़: आजादी के बाद से विकास परियोजनाओं के चलते दर-ब-दर लोग।

10 लाख: औसतन हर साल विस्थापित होने वाले लोगों की संख्या।

2.6 करोड़: पूरी दुनिया में ऐसे लोग, जिनका विस्थापन उनके देश के अंदर हुआ।

1.5-1.6 करोड़: दुनिया में कुल शरणार्थियों की संख्या।

10 लाख: दुनिया में आश्रय मांगने वाले लोगों की संख्या।

4.3 करोड़: दुनिया मे ऐसे लोग जिन्हें घर छोड़ने पर विवश किया गया।

कारण

अलगाववादी आंदोलन, पहचान आधारित स्वायत्तता आंदोलनों और जाति आधारित विवादों सहित विकास और पर्यावरण विस्थापन के प्रमुख कारण हैं। आजादी के बाद विकास की तेज रफ्तार हासिल करने के लिए तमाम योजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण से विस्थापन को जमकर बढ़ावा मिला।

बांधों का निर्माण

समय --- 15मी. से ऊंचे --- 10-15 मी. ऊंचे --- कुल

1900 तक --- 28 --- 14 --- 42

1901-50 --- 118 --- 133 --- 251

1951-70 --- 418 --- 277 --- 695

1971-89 --- 1187 --- 1069 --- 2256

1990

और बाद --- 56 --- 60 --- 116

विवरण अनुपलब्ध --- 74 --- 162 --- 236

निर्माणाधीन --- 461 --- 234 --- 695

कुल --- 2342 --- 1949 --- 4291

बड़े बांधों से विस्थापित आबादी

परियोजना --- राज्य --- विस्थापित लोग ---- विस्थापित जनजाति फीसद में

कर्जन --- गुजरात --- 11,600 --- 100

सरदार सरोवर --- गुजरात --- 2,00,000 --- 57.6

महेश्वर --- मध्य प्रदेश --- 20,000 --- 60

बोधघाट --- मध्य प्रदेश --- 12,700 --- 73.91

इचा --- झारखंड --- 30,800 --- 80

चांडिल --- बिहार --- 37,600 --- 87.92

कोयल कारो --- बिहार --- 66,000 --- 88

माही बजाज सागर --- राजस्थान --- 38,400 --- 76.28

पोलावरम --- आंध्र प्रदेश --- 1,50,000 --- 52.90

मैथॉन और पांचेत --- बिहार --- 93,874 --- 56.46

ऊपरी इद्रावती --- ओडिशा --- 18,500 --- 89.20

पोंग --- हिमाचल प्रदेश --- 80,000 --- 56.25

इचमपल्ली --- आंध्र-महाराष्ट्र --- 38,100 --- 76.28

तुलतुली महाराष्ट्र ---13,600 --- 51.61

दमन गंगा --- गुजरात --- 8,700 --- 48.70

भाखड़ा --- हिमाचल --- 36,000 --- 31

मसन जलाशय ---- बिहार --- 3,700 --- 31

उकई जलाशय --- गुजरात --- 52,000 --- 18.92

1950 के बाद से विकास परियोजनाओं के चलते विस्थापित लोग [लाख मे]

परियोजना --- कुल विस्थापित लोग --- विस्थापन प्रतिशत में --- पुनर्वास हुआ --- पुनर्वास प्रतिशत में --- गैर पुनर्वासित लोग --- प्रतिशत में --- विस्थापित जनजाति --- कुल विस्थापन का प्रतिशत --- जनजातियों का पुनर्वास --- प्रतिशत में --- गैर पुनर्वासित जनजाति --- प्रतिशत में

बांध --- 164.0 --- 77.0 --- 41.00 --- 25.0 --- 123.00 --- 75.0 --- 63.21 --- 38.5 --- 15.81 --- 25.00 --- 47.40 --- 75.0

खनन --- 25.5 --- 12.0 --- 6.30 --- 24.7 --- 19.20 --- 75.3 --- 13.30 --- 52.20 --- 3.30 --- 25.00 --- 10.00 --- 75.0

उद्योग --- 12.5 --- 5.9 --- 3.75 --- 30.0 --- 8.75 --- 70.0 --- 3.13 --- 25.0 --- 0.80 --- 25.0 --- 2.33 --- 75.0

वन्यजीव --- 6.0 --- 2.8 --- 1.25 --- 20.8 --- 4.75 --- 79.2 --- 4.5 --- 75.0 --- 1.00 --- 22.0 --- 3.50 --- 78.0

अन्य --- 5.0 --- 2.3 --- 1.5 --- 30.0 --- 3.50 --- 70.0 --- 1.25 --- 25.0 --- 0.25 --- 20.2 --- 1.00 --- 80.0

कुल --- 213.0 --- 100 --- 53.80 --- 25.0 --- 159.20 --- 75.0 --- 85.39 --- 40.9 --- 21.16 --- 25.0 --- 64.23 --- 79.0

जनमत

क्या विकास के लिए लोगों को विस्थापित किया जाना सही है?

हां 38 फीसद

नहीं 62 फीसद

क्या पुनर्वास के बिना लोगों को विस्थापित करना उचित है?

हां 21 फीसद

नहीं 79 फीसद

आपकी आवाज

इस समस्या से निपटने के लिएएक सख्त कानून की जरूरत है। बिना इसके विस्थापित होने वाले लोगों को न्याय नहीं मिल सकता। -देव पी 704 @ जीमेल.कॉम

बिना विस्थापन के भी विकास किया जा सकता है। विकास जरूरी है लेकिन आम जनता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। -कैफ 9931466111 @ जीमेल.कॉम

विकास का अर्थ जनता को सुविधापूर्ण जीवन प्रदान करना है न कि विस्थापन का दर्द झेलने पर मजबूर करना। -टाक विद आर्यन 20 @ जीमेल.कॉम

पुनर्वास के नाम पर लोगों के साथ मजाक करते हैं हमारे नीति नियंता। वर्षो पहले किए गए अधिग्रहण के मामलों में अभी तक पुनर्वास और विस्थापन लंबित हैं। -अशीष केएनपी @ याहू.को.इन

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