कुमार पर अविश्वास और कपिल के वार से आप परेशान

Publish Date:Tue, 20 Jun 2017 01:00 AM (IST) | Updated Date:Tue, 20 Jun 2017 01:00 AM (IST)
कुमार पर अविश्वास और कपिल के वार से आप परेशानकुमार पर अविश्वास और कपिल के वार से आप परेशान
सौरभ श्रीवास्तव, नई दिल्ली दो साल पहले दिल्ली विधानसभा की 70 में से 67 सीटें लेकर सत्तारूढ़ हुई

सौरभ श्रीवास्तव, नई दिल्ली

दो साल पहले दिल्ली विधानसभा की 70 में से 67 सीटें लेकर सत्तारूढ़ हुई आम आदमी पाटी (आप) डेढ़ महीने पूर्व हुए दिल्ली निगम चुनाव में हार के बाद मुसीबतों में घिरती जा रही है। पार्टी के साथ ही अरविंद केजरीवाल सरकार को भी एकसाथ कई मोर्चो पर जूझना पड़ रहा है। जहां पार्टी में बाहर और भीतर दोनों ही मोर्चो पर टकराव की स्थिति है, वहीं सरकार के स्तर पर भी परायों के साथ अपने भी मुश्किल का सबब बन रहे हैं।

नगर निगम चुनावों में पराजय को इसकी वजह कहें या कि पार्टी में वर्चस्व की जंग, आप को पार्टी के बाहर से लगातार आरोपों की झड़ी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं अंदरखाते भी सत्ता संघर्ष साफ नजर आ रहा है। पार्टी से समय-समय पर अलग हुए नेता आप को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ते, वहीं पार्टी से निलंबित किए गए बर्खास्त मंत्री कपिल मिश्रा के तरकस के तीर खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं। विगत रविवार को ही लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) घोटाले को लेकर उन्होंने अरविंद केजरीवाल को चुनौती दे डाली कि वह सुबूत दे रहे हैं, मुख्यमंत्री कार्रवाई करें। कपिल मिश्रा के एक के बाद एक लगाए जा रहे आरोपों से पार्टी पार भी नहीं पा पाई है कि अपने वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास पर से आप का विश्वास उठता साफ नजर आ रहा है। इसे पार्टी में वर्चस्व की जंग के रूप में देखा जा रहा है। विश्वास ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए तो उन्हें राजस्थान का प्रभार देकर शांत करने की कोशिश की गई, लेकिन मामला शांत नहीं हुआ। आप के वरिष्ठ नेताओं ने विश्वास पर हमला जारी रखा है तो विश्वास भी अपने बयानों से संकेत दे रहे हैं कि पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है। हाल ही में पार्टी प्रवक्ता दिलीप पांडेय ने राजस्थान चुनाव को लेकर विश्वास पर वसुंधरा राजे सरकार के खिलाफ कुछ न बोलने का आरोप लगाया। इसके बाद पार्टी के कोषाध्यक्ष दीपक वाजपेयी ने गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान पांच सितारा होटल में ठहरने को लेकर विश्वास पर तंज कसा। सोमवार को आप की यूथ विंग की वरिष्ठ पदाधिकारी वंदना सिंह ने भी काफी खुले शब्दों में विश्वास को पार्टी का विरोधी बताने की कोशिश की। विश्वास भी अपने बयानों से बगावत के संकेत दे रहे हैं, ऐसे में इसे सामान्य घटनाक्रम नहीं कहा जा सकता।

आम आदमी पार्टी जहां कठिन घड़ी से दो-चार हो रही है, वहीं केजरीवाल सरकार भी मुश्किल दौर से गुजरती नजर आ रही है। केंद्र सरकार और उपराज्यपाल पर शुरू से निशाने साधते हुए असहयोग का आरोप लगाने वाली केजरीवाल सरकार के कुछ मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप गहरा रहे हैं और सीबीआइ का फंदा कसता जा रहा है, जो उसके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। सोमवार को भी मंत्री सत्येंद्र जैन के आवास पर सीबीआइ ने छापेमारी की। इस बीच, सरकार के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए कई अधिकारी भी उससे नाराज नजर आ रहे हैं। हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते दिनों मंगोलपुरी के संजय गांधी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को हटाने के लिए भी मुख्यमंत्री को उपराज्यपाल को पत्र लिखना पड़ा था। विपक्षी दल भी आरोप लगा रहे हैं कि अधिकारी दिल्ली सरकार में काम नहीं करना चाहते। ऐसे में सरकार के लिए सामान्य कामकाज करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।

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