यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 16, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
टैक्स क्रेडिट के बड़े दावों की जांच करेगा सीबीईसी
टैक्स क्रेडिट मिलने की सुविधा जीएसटी के लागू होने से छह महीने तक ही वैध रहेगी

नई दिल्ली (पीटीआई)। जीएसटी के अमल में आने के बाद जुलाई महीने के पहली बार दाखिल रिटर्न में करीब 95,000 करोड़ रुपये का कर संग्रह हुआ। इसके मुकाबले कारोबारियों और फर्मो ने जीएसटी व्यवस्था में जाने से पहले के 65,000 करोड़ रुपये से अधिक राशि के क्रेडिट दावे किए हैं। यानी यह राशि कंपनियों और उद्यमियों को लौटाई जानी है। इसे देखते हुए केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) एक करोड़ रुपये से अधिक राशि के सभी दावों की जांच करने का फैसला लिया है। जीएसटी के तहत कंपनियों को पुरानी व्यवस्था के अंतर्गत किए गए स्टॉक की खरीद पर चुकाए गए कर के क्रेडिट का दावा करने की सुविधा दी गई है। यह सुविधा जीएसटी लागू होने के छह माह बाद तक के लिए ही उपलब्ध है।
सीबीईसी ने कंपनियों और उद्यमियों की ओर से किए गए भारी-भरकम दावों को देखते हुए मुख्य आयुक्तों को 11 सितंबर को पत्र भेजा है। इसमें बोर्ड ने कहा है कि 162 कंपनियों ने एक करोड़ रुपये से अधिक के क्रेडिट का दावा किया है। इसलिए कर अधिकारी इन दावों की जांच करें। कर प्रशासन की ओर से छानबीन के बाद ही पता चलेगा कि ये दावे सही हैं या गलत।
जुलाई में पहला जीएसटी रिटर्न फाइल करते समय कंपनियों और व्यापारियों ने बकाया दावों के लिए ट्रांजिशनल क्रेडिट से जुड़ा ट्रान-1 फॉर्म भी दाखिल किया था। इसके जरिये फर्मो व कारोबारियों ने उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट के तहत 65 हजार करोड़ के बकाये का दावा किया। बीते हफ्ते तक 59.97 लाख करदाताओं में से 70 फीसद ने रिटर्न भर दिया था।
सीबीईसी के सदस्य महेंद्र सिंह ने पत्र में कहा था कि जीएसटी व्यवस्था में जाने की संक्रमण अवधि का बकाया तभी भुगतान किया जाएगा, जब यह कानूनन वैध होगा। गलती से या गलतफहमी में अपात्र बकाया दावे की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। एक करोड़ से अधिक के क्रेडिट के दावों की तय समय सीमा में जांच की जाए। मुख्य आयुक्तों से इन 162 कंपनियों के दावों पर 20 सितंबर तक रिपोर्ट मांगी गई है। जीएसटी के तहत सिर्फ पात्र दावे आगे बढ़ाने के लिए सीबीईसी ने फील्ड अफसरों से कहा है कि वे नए रिटर्न को पुरानी प्रणाली के तहत दाखिल रिटर्न से मिलाएं।
