यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 16, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
छोटे कारोबारियों के हाथ लगा बड़ा हथियार, सौ और इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स पंजीकृत होंगे
छोटे कर्जदारों के लिए बड़े बकायेदारों से अपना बकाया वसूलना फिलहाल आसान हो गया है

नई दिल्ली (पीटीआई)। छोटे कर्जदारों के हाथ में नये इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आइबीसी) के जरिये एक ऐसा हथियार मिल गया है जिससे वे आसानी से बड़े बकायेदारों से बकाया पैसा वसूल कर सकते हैं। इससे पहले यह वसूली कर पाना मुमकिन नहीं हो पाता था। ऐसा ही एक मामला जून में आया जब देश की शीर्ष विंड पावर इक्विपमेंट निर्माता कंपनी आयनॉक्स विंड लिमिटेड के खिलाफ उसके एक ट्रांसपोर्टर ने सिर्फ 56 लाख रुपये बकाये की वसूली के लिए आइबीसी के तहत कार्रवाई कर दी। महज दो सप्ताह में ही यह मामला निपट गया और बकाये का भुगतान हो गया।
यह मामला दर्शाता है कि किस तरह छोटे कारोबारी और सप्लायर आइबीसी का इस्तेमाल करके बड़ी कंपनी पर दबाव बना सकते हैं और अपना बकाया निकाल सकते हैं। अभी तक इन लोगों के लिए बकाया राशि वसूल कर पाना मुमकिन नहीं हो पाता था। दरअसल आइबीसी ने छोटे कारोबारियों और व्यवसायियों को अपने बड़े कारोबारी भागीदारों से पैसा वसूलने का प्रभावी हथियार थमा दिया है। सरकार ने पिछले साल ही दिवालिया कानूनों में सुधार किया था। मुख्य रूप से यह कदम करीब 8.5 लाख करोड़ रुपये के बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) वसूलने के लिए उठाया गया था। तेजी से बढ़े एनपीए ने देश की अर्थव्यवस्था के सामने बड़ा संकट पेश कर दिया है।
दिवालिया मामलों के लिए काम करने वाले इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स का कहना है कि आइबीसी में छोटे सप्लायरों को भी कर्जदार के तौर पर माना गया है। ये कारोबारी अपना बकाया निकालने के लिए इस कानून का बैंकों से कहीं ज्यादा प्रभावी तरीके से फायदा उठा रहे हैं। बैंकों की बकाया राशि काफी बड़ी होती है इसलिए उनके लिए इस कानून के तहत वसूली थोड़ा ज्यादा मुश्किल है। इंसॉल्वेंसी केस देखने वाले ग्रांट थॉर्नटन के पार्टनर आशीष छावछरिया ने कहा कि यह गलत नहीं है लेकिन इस कानून को लाने का मकसद यह नहीं था। कानून के तहत अगर किसी पर बकाया राशि एक लाख रुपये है तो उसे कर्जदार कंपनी को अदालत में घसीटने का अधिकार है।
सौ और इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स पंजीकृत होंगे
इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आइबीबीआइ) करीब 100 और इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स को पंजीकृत करने जा रहा है। ये प्रोफेशनल्स ही दिवालिया मामलों पर काम करते हैं। आइबीबीआइ के पूर्णकालिक सदस्य नवरंग सैनी ने यहां बताया कि इस समय आइबीबीआइ में पंजीकृत प्रोफेशनल्स की संख्या 940 है। 100 और प्रोफेशनल्स पंजीकृत हो जाएंगे। यह नियमित प्रक्रिया है। हम आवेदन प्राप्त करते हैं और निश्चित प्रक्रिया के तहत पंजीकरण करते हैं। इन प्रोफेशनल्स का मुख्य काम दिवालिया की कार्रवाई होने पर सोल्यूशन प्लान बनाना है।
