यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 05, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दिवालिया प्रक्रिया पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा IDBI बैंक, समझिए आखिर क्या है पूरा मामला
जेपी इंसॉल्वेंसी मामले में खरीदारों और बैंकों में से किसे फायदा मिलेगा यह आगामी सोमवार को स्पष्ट हो पाएगा

नई दिल्ली (प्रवीण द्विवेदी)। बैंक, जेपी इन्फ्राटेक, एनसीएलटी और सुप्रीम कोर्ट। इन चारों संस्थानों की सक्रियता के बीच आम आदमी परेशान है और असमंजस में भी। आईडीबीआई बैंक ने मंगलवार को जेपी इंफ्राटेक के दिवालिया घोषित किए जाने की प्रक्रिया पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। आईडीबीआई की तरफ से जाने-माने वकील मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि जेपी को दिवालिया घोषित प्रक्रिया पर रोक लगाना गलत है। उन्होंने कहा कि इससे जेपी को फायदा हो रहा है।
सिंघवी के मुताबिक नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की प्रक्रिया पर रोक लगाने का मतलब जेपी को संपत्ति का स्वतंत्र अंतरिम प्रस्ताव देना है। वहीं दूसरी तरफ घर खरीददारों की ओर से वरिष्ठ वकील एके सिन्हा और केवी विश्वनाथन ने आईडीबीआई की याचिका का विरोध किया। इस पूरे मामले में किसे फायदा होगा और किसे राहत मिलेगी यह आने वाले सोमवार को ही पता लगेगा क्योंकि कोर्ट इस मामले पर अब 11 सितंबर को सुनवाई करेगा।
क्या है पूरा मामला:
ई-सचिव (esachiv. Com) के सीईओ मयंक वशिष्ठ ने बताया कि जेपी इन्फ्राटेक के पास आईडीबीआई बैंक का काफी साला लोन बकाया है। दरअसल, जेपी इंफ्रा ने 526 करोड़ का लोन डिफॉल्ट किया था। कंपनी आईडीबीआई बैंक का 500 करोड़ रुपये का लोन नहीं चुका पाई। जेपी ठीक ढंग से काम भी नहीं कर रहा था। इसके बाद आईडीबीआई ने इलाहाबाद एनसीएलटी (चूंकि यह उत्तर प्रदेश का मामला है) का दरवाजा खटखटाया और अपील की कि कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया जाए। इलाहाबाद एनसीएलटी ने इंसाल्वेंसी ऑर्डर पास कर दिया।
एनसीएलटी के इस आदेश के सामने आते ही वो कस्टमर घबरा गए जिन्होंने इस बिल्डर के मार्फत घर खरीदने के लिए करोड़ों रुपए जमा कराए हैं। क्योंकि अगर कंपनी दिवालिया होती है तो कस्टमर को घर तो मिलेगा ही नहीं साथ ही उन्हें जो रकम मिलेगी वो भी उनकी ओर से दी गई रकम से काफी कम (लंप-सम राशि) होगी। यानी कुल मिलाकर उनका नुकसान होगा। कस्टमर इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट चले गए और उन्होंने कहा कि इंसाल्वेंसी ऑर्डर पर रोक लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कस्टमर का ख्याल करते हुए एनसीएलटी के आदेश पर रोक लगा दी और कंपनी से कहा कि वो ग्राहकों को पैसे नहीं बल्कि उनका घर बनाकर दे। अब जेपी इन्फ्राटेक को सोचना होगा कि वो लोगों को उनका घर कैसे उपलब्ध करवाती है।
क्या कहते हैं लीगल एक्सपर्ट:
मेवन लीगल एलएलपी के पार्टनर एवं एड्वोकेट जीवेश मेहता ने बताया कि आईडीबीआई बैंक ने इन्साल्वेंसी कोड 2016 के अंतर्गत इलाहाबाद एनसीएलटी की ओर रुख किया था। इसके लिए उसने एक पिटीशन (याचिका) दायर की थी। उन्होंने बताया कि दो तरह के क्रेडिटर होते हैं एक सिक्योर्ड क्रेडिटर जो कि बैंक होते हैं और दूसरे अनसिक्योर्ड क्रेडिटर जो कि ग्राहक होते हैं। ऐसे में जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ एनसीएलटी में याचिका दायर कर बैंक ने खुद को सेफ करने की कोशिश की क्योंकि दिवालिया होने के बाद संपत्तियां बेचकर जो भी पैसा आता है उसमें पहला हिस्सा बैंकों को दिया जाता है, ग्राहकों का नंबर सबसे बाद में आता है। इस फैसले के बाद जब ग्राहकों को लगा कि अगर कंपनी दिवालिया हो गई तो उनकी वो गाढ़ी पूंजी डूब जाएगी जो उन्होंने घर खरीदने के लिए खंपा दी है। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसने सोमवार को इंसाल्वेंसी प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
हालांकि जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही की बहाली के लिए आईडीबीआई बैंक ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। कुल मिलाकर देखा जाए तो इसमें सुप्रीम कोर्ट का रुख उन ग्राहकों की ओर नरम दिखाई दे रहा है जिन्होंने पैसा देकर फ्लैट की बुकिंग करा रखी है।
क्या कहना है प्रॉपर्टी एक्सपर्ट का:
रियल्टी सेक्टर के एक्सपर्ट प्रदीप मिश्रा ने बताया कि इस मामले पर अभी कुछ भी कहना उचित नहीं होता क्योंकि इसकी साफ तस्वीर सामने नहीं आ पाई है। एनसीएलटी की ओर से इंसाल्वेंसी के आदेश के बाद जेपी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को खत्म (डिसॉल्व) कर दिया गया। इसके बाद अनुज जैन के पास पूरी कमान आ गई।
आपको बता दें कि अनुज जैन को इन्सॉकल्वेंोसी प्रोफेशनल (आईआरपी) नियुक्त किया है। दिवालिया प्रक्रिया पर लगाई गई रोक के खिलाफ आईडीबीआई बैंक ने इसलिए रुख किया है क्योंकि उसे कोर्ट से स्पष्टता चाहिए कि बतौर सिक्योर्ड क्रेडिटर उसे पैसा कैसे मिलेगा। ऐसे में आगामी सोमवार यानी 11 सितंबर को ही तस्वीर साफ हो पाएगी कि इंसाल्वेंसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा या फिर यह रोक बरकरार रहेगी।
