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गर्मी की धमक, जल संकट शुरू

Publish Date:Fri, 21 Mar 2014 08:35 PM (IST) | Updated Date:Fri, 21 Mar 2014 08:35 PM (IST)

जासं, सीतामढ़ी : गर्मी की धमक के साथ ही धरती की प्यास बढ़ने लगी है। जलाशयों व छोटे-छोटे तालाब सूखने लगे हैं। पानी का लेयर कम होना इस बात का संकेत है कि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में लोगों के समक्ष जल संकट एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ सकता है।

पिछले साल की तुलना में कहीं कहीं जलस्तर एक फुट गिरा है। पिछले साल 14 से 16 फुट पर लेयर था, अब 15 फुट पर चला गया है। कही कही चापाकल के सूखने की भी खबर है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का स्तर गिरने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। हालाकि प्रशासनिक स्तर पर खराब चापाकलों की मरम्मत करायी गई है, पर अभी भी चापाकल मरम्मत की बाट जोह रहा है। परिहार प्रखंड के नरंगा गांव में पानी की किल्लत है। कई सालों से दिसंबर से चापाकल सूखने लगता है और यह दौर तब तक चलता रहता है जब तक की बारिश नहीं होती है। परिहार प्रखंड के ही श्री रामपुर गांव में भी चापाकल सूख गए है। इस तरह के दर्जनों गांव है जिले में जहां गर्मी की धमक से पूर्व ही जल संकट का दौर शुरू हो गया है। श्री गांधी उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक सत्य नारायण सहनी इसे गंभीर संकेत मानते हुए कहते है कि बदले पर्यावरण के कारण वर्षा की मात्रा निरंतर कम होती जा रही है। जिससे भू-जल पर्याप्त नहीं हो पाता है। भू जल का दोहन किया जा रहा है। परिणाम स्वरूप पानी का स्तर नीचे जाने लगा है। हिमालय की गोद में बसे इस जिले में पानी की कमी नहीं है। बारिश, नदी, सरोवर व कुंआ जैसे जलस्त्रोत उपलब्ध है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में पेयजल का एक मात्र स्त्रोत चापाकल ही है। लेकिन अब यह चापाकल भी लोगों को पानी देने में नकारा साबित हो रहा है। इलाके में पिछले साल बारिश नहीं होने से नदी सूखी रही है और कुंओं का वजूद भी समाप्त हो गया है। शहर में चापाकल के अलावा पीएचइडी की पेयजलापूर्ति व्यवस्था है। लेकिन टूटी फुटी टंकियों के जरिए लोगों के घरों तक दूषित पानी पहुंच रहा है।

पोखर व कुंओं को करें जीवित

घट रहे जलस्त्रोत आनेवाली पीढ़ी के लिए निश्चित रूप से चिंता का विषय है। नदी, पोखर व कुंओं के सूखने का क्रम जारी है। विभागीय स्तर पर इसका आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। सूखे कुएं व जलाशयों को जीवित करने की जरूरत है। वहीं विभागीय स्तर पर इसे बचाने की दिशा में कोई पहल नहीं की जा सकी है। अधिकारी बताते हैं कि बारिश होने के साथ जलाशयों में पुन: पानी आ जाएगा। कहा कि जिले में जलसंकट जैसी कोई स्थिति नहीं है। गांवों में पर्याप्त चापाकल हैं, जिसका पानी लोगों को आसानी से मिल रहा है।

चल रहे जनजागरुकता अभियान : पीएचईडी के एलटी सुनील कुमार बताते है कि पानी को बचाने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाए जा हरे है। वहीं वर्षा जल संरक्षण पर भी काम चल रहा है। पौधरोपण अभियान भी जारी है। उधर, मनीष कुमार व सतीश कुमार बताते है कि हाल के दिनों में पानी की बर्बादी हो रहीं है, जो आने वाले समय में परेशानी का सबब बनेगा। नवीन कुमार बताते है कि अगर हम आज से नहीं संभले तो आने वाली पीढ़ी के लिए पानी परेशानी बन कर उभरेगा।

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