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वजूद बचाने को संघर्ष कर रहे खेल मैदान

Publish Date:Thu, 05 Jan 2017 03:04 AM (IST) | Updated Date:Thu, 05 Jan 2017 03:04 AM (IST)
रोहतास। शहर के खेल मैदान एक-एक कर अतिक्रमण के शिकार होते जा रहे हैं। जिस मैदान पर

रोहतास। शहर के खेल मैदान एक-एक कर अतिक्रमण के शिकार होते जा रहे हैं। जिस मैदान पर जिला स्तरीय खेल का आयोजन होता था, आज वहां अतिक्रमणकारियों का कब्जा है, जो भाग बचे हैं, उनपर भी अतिक्रमणकारियों की नजर है। रखरखाव के अभाव में खेल मैदानों के हाल खस्ताहाल हैं। जिससे शहर की खेल गतिविधियां सिमटती जा रही हैं।

वजूद बचाने को संघर्ष कर रहे पुराने ग्राउंड :

शहर से सटे दो पुराने प्ले ग्राउंड पड़ाव मैदान व चित्रगुप्त मैदान अपना वजूद बचाने को ले संघर्षरत हैं। पड़ाव मैदान की चारों तरफ झुग्गी-झोपड़ी, बक्सा बनाने की दुकान, सब्जी मंडी, मुर्गा व मीट दुकान भरे पड़े हैं। वहीं आसपास के घरों का पानी व कूड़ा डंप भी इसी खेल मैदान में हो रहा है। स्थानीय लोगों में मैदान को अतिक्रमित करने की होड़ लगी है। चित्रगुप्त मैदान का भी हाल कुछ ऐसा ही है। कभी इस मैदान में क्रिकेट का पिच हुआ करता था। जिसे नष्ट कर दिया गया है।

खिलाड़ी करते हैं फसल कटने का इंतजार :

आशुतोष ¨सह व अभिषेक कुमार का कहना है कि मैदान पर इतनी गाड़ियों को खड़ा कर दिया गया है कि खिलाड़ियों को पैर रखने तक की जगह नहीं है। हमें मजबूर हो खेत में फसलों के काटने का इंतजार करना पड़ता है। अमन कुमार का कहना है कि सभी जब्त वाहनों को लगभग सात वषों से अब्दुल कयूम अंसारी बि¨ल्डग, ¨सचाई कॉलोनी आवासीय परिसर, आइटीआइ मैदान में बेतरतीब तरीके से यहां खड़े किए गए हैं।

कहते हैं खिलाड़ी :

शहर के बच्चे प्रतिभाशाली हैं, लेकिन प्लेग्राउंड व प्रैक्टिस के अभाव में प्रतिभा कुंठित हो रही है। यह भूमि खेल क्षेत्र के लिए एतिहासिक रहा है। यहां के निवासी नौशाद आलम उ़र्फ गुड्डू तीन वर्ष तक संतोष ट्रॉफी में बिहार फुटबॉल टीम के कोच रह चुके हैं।

-राज किशोर (क्रिकेटर)

नौशाद आलम के अब्बु समसुल ह़क, विद्युत विभाग औरंगाबाद व भाई शकील आलम, रेलवे में खेल कोटा से ही नौकरी हासिल किए हैं। इसके पूर्व दलिराम व टेक बहादुर डेहरी का नाम राज्य स्तर पर रोशन कर चुके हैं। लेकिन वर्तमान व्यवस्था में खेल मैदानों पर संकट से आज के युवकों को यह मौका नहीं मिल पा रहा है।

वैदुल अंसारी

कहते हैं पूर्व फुटबॉल कोच :

जिला प्रशासन व सरकार की नजरें युवा पीढ़ी और खेल मैदान पर इनायत नहीं होने की वजह से बुरा हाल है। उम्मीद है कि दूसरे राज्यों की तरह यहां की सरकार भी हर शहर में युवाओं को प्लेग्राउंड उपलब्ध कराएगी। जिससे युवाओं को स्वस्थ रहने व खेल के जरिए भविष्य बनाने का मौका मिलेगा। आज खेल मैदान नहीं होने की वजह से बच्चे व युवा कंप्यूटर, मोबाइल गेम व लैपटॉप में अपना भविष्य खपा रहे हैं।

नौशाद आलम उ़र्फ गुड्डू

पूर्व कोच, संतोष ट्रॉफी टीम, बिहार

डेहरी में प्ले ग्राउंड की समस्या है। हम सभी प्रयास में लगे हैं। जल्द से जल्द वाहनों को सुरक्षित स्थान देख कर हटाया जाएगा। कोर्ट में मामला लंबित रहने के चलते वाहनों की नीलामी नहीं हो पा रही है। युवाओं के प्रति हम सजग हैं।

अनिमेष कुमार पराशर,

डीएम, रोहतास।

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Web Title:play ground struggle for existance(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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