कुपित इन्द्र से की ब्रजवासियों की रक्षा

Publish Date:Sat, 04 Feb 2012 08:03 PM (IST) | Updated Date:Sat, 04 Feb 2012 08:04 PM (IST)

कोचस (रोहतास), निज प्रतिनिधि : लोक आस्था के प्रतीक कोचस के श्रीकृष्ण लीला में शनिवार को प्रतीकात्मक गोकुल स्थान वेदी पर गोव‌र्द्धन पूजा प्रसंग दिखाया गया। नंद ग्राम में व्रज वासी को बुला कुलदेवता इन्द्र की पूजा करने की बात कही जाती है। प्रत्येक घर में इन्द्र के पूजन हेतु गान बजान के साथ पकवान बनाना शुरू होता है। जिसे देख श्रीकृष्ण मइया यशोदा से कहते हैं कि मइया कौन ऐसा देवता हैं जो अकेला इतना पकवान खा जाएगा? यशोदा कृष्ण को डांटते हुए कहती है कि कुल देवता के बारे में ऐसा नहीं कहते। पर कृष्ण ठान लेते हैं कि अब पूजा होगी तो गिरि गोव‌र्द्धन की। श्रीकृष्ण यशोदा से कहते हैं कि हे मइया स्वप्न में गिरि गोव‌र्द्धन सर्वशक्तिमान दिखाई दिये हैं उन्होंने मनोवांछित फल देने की बात कही है। इसलिए इस पकवान से भगवान गोव‌र्द्धन की पूजा करनी चाहिए। कृष्ण के हठ से मइया यशोदा समेत ब्रजवासी तैयार हो गोव‌र्द्धन की पूजा करने चल देते हैं। इधर इन्द्र कुपित होकर मेघ को व्रज को मिटाने की आज्ञा देते हैं। मेघ भारी गर्जना के साथ व्रज में उथल-पुथल मचाने लगते हैं। श्रीकृष्ण व्रजवासी को भयभीत देख गोव‌र्द्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठा व्रजवासियों की रक्षा करते हैं। इन्द्र भगवान की लीला को समझकर अपने कामधेनू को आगे कर भगवान श्रीकृष्ण से क्षमायाचना करते हैं। यह दृश्य देख घंटा व शंख ध्वनि के साथ श्रीकृष्ण की जयकारी लगने लगती है।

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