पूर्णिया में बनेगा विश्वविद्यालय, मिली केबिनेट की मंजूरी

Publish Date:Sun, 31 Jul 2016 03:01 AM (IST) | Updated Date:Sun, 31 Jul 2016 03:01 AM (IST)
पूर्णिया। भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के बनने से पहले से पूर्णिया में विश्वविद्यालय बनाने की

पूर्णिया। भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के बनने से पहले से पूर्णिया में विश्वविद्यालय बनाने की मांग की जाती रही है। शनिवार को इस मांग पर केबिनेट की मुहर लग गई। अब माना जा रहा है कि पूर्णिया में विश्वविद्यालय बनाने के लिए कुछ औपचारिकता ही बची है। पिछली बार मुख्यमंत्री दौरे के वक्त ही पूर्णिया को विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की थी जिसे शनिवार को केबिनेट मंजूरी के साथ पूरी कर दी गयी है।

पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया का समृद्ध इतिहास रहा है। राष्ट्रकवि रामधारी ¨सह दिनकर ने रश्मिरथी की रचना पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया में की थी। जनार्दन झा द्विज जैसे साहित्यकार यहां के प्राचार्य रह चुके हैं। छात्र और शिक्षक दोनों इस घोषणा के बाद काफी खुश हैं। कॉलेज के प्राचार्य संजीव कुमार का कहना है कि यह सचमुच उत्सव का समय है। विश्वविद्यालय स्थापना को मंजूरी मिलने से यहां के शिक्षण का स्तर काफी बेहतर होगा। कॉलेज का काफी पूराना इतिहास रहा है ऐसे में नामाकरण में भी इन बातों का ध्यान रखा जाय तो काफी ठीक होगा। अंग्रेजी के शिक्षक एसएल वर्मा ने कहा कि इस खबर से कॉलेज से जुड़े सभी लोग काफी रोमांचित महसूस कर रहे हैं। इससे शैक्षिणिक के साथ प्रशासनिक दिक्कत भी होगी आसान। वरिष्ठ शिक्षक गौरीकांत झा ने कहा कि यह विश्वविद्यालय बनने की कवायद काफी लम्बे समय चली आ रही है। विश्वविद्यालय की मंजूरी के बाद अभी भी काफी लम्बा समय का इंतजार करना होगा। श्री झा ने कहा केवल विश्वविद्यालय स्थापना ही नहीं उस मापदंड पर खरे हो सके इसके लिए उचित संसाधन मिलना भी जरुरी है। गुणवत्तापूर्ण और स्तरीय शिक्षा ही इसका एक मात्र इलाज है कि छात्रों को वापस विश्वविद्यालय और कॉलेज से जोड़ा जा सके। नहीं तो आज के समय में कॉलेज से छात्र की दूरी बढ़ती जा रही है। बड़ी संख्या में छात्रों ने भी इस घोषणा का स्वागत किया है। उन्होने कहा कि मधेपुरा में जाकर छात्रों को काम कराने या कई विषयों की पढ़ाई के लिए जाना होता है उससे भी बचा जा सकेगा। बीए तृतीय वर्ष के छात्र रमण कुमार का कहना है कि मास्टर डिग्री की पढ़ाई के लिए मधेपुरा जाना होता था अब शायद यहीं से वह संभव हो जायेगा। छात्र संजय कुमार भी काफी खुश दिखे। आमतौर पर विश्वविद्यालय बनने से बुद्धिजीवी वर्ग और आमलोगों ने स्वागत किया है। जाहिर है विश्वविद्यालय बनने से व्यवसाय को भी काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है इसलिए वैसे वर्ग के लोग भी खुश है जिसका सीधा संबंध शिक्षा से नहीं है। माना जा रहा है कि पूर्णिया कटिहार और किशनगंज के सभी कॉलेज प्रस्तावित विश्वविद्यालय का हिस्सा होंगे।

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