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विश्व जल दिवस विशेष : पटना में तालाब तोड़ रहे दम, वाटर लेवल हो रहा कम

Publish Date:Wed, 22 Mar 2017 09:59 AM (IST) | Updated Date:Wed, 22 Mar 2017 10:58 PM (IST)
विश्व जल दिवस विशेष : पटना में तालाब तोड़ रहे दम, वाटर लेवल हो रहा कमविश्व जल दिवस विशेष : पटना में तालाब तोड़ रहे दम, वाटर लेवल हो रहा कम
पहले पटना सहित पूरे राज्‍य में पर्याप्‍त तालाब थे। जल की कोई कमी नहीं थी। लेकिन, बढ़ती जनसंख्‍या की जरूरतें इन्‍हें लीलती चली गईं। आज इस कारण हम पानी की किल्‍लत से जूझ रहे हैं।

पटना [जागरण टीम]। एक जमाना था जब राजधानी लगभग हर मोहल्ले में तालाब हुआ करता था। आबादी बढ़ी तो इन तालाबों पर इमारतें बनने लगीं। आज स्थिति ये है कि शहर में गिने-चुने तालाब ही बचे हैं। कुछ ऐसा ही हाल पूरे राज्य का है। सूबे के आधे से अधिक तालाब भरने के कगार पर पहुंच चुके हैं। मत्स्य विभाग के अंतर्गत प्रदेश में करीब 70 हजार तालाब थे लेकिन इनमें से अधिकांश लगभग भर चुके हैं।
2013 में पटना हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश भी दिया कि सूबे के सभी सरकारी तालाबों को अतिक्रमणमुक्त कर जीर्णोद्धार कराया जाए। हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार द्वारा प्रत्येक जिलाधिकारी को आदेश दिया गया, लेकिन इस पर अमल शायद ही हुआ।

वाटर रिचार्ज का बड़ा माध्यम
गांव-मोहल्ले के तालाब वाटर लेवल बनाए रखने में काफी मदद करते थे। बारिश के दिनों में पूरे गांव-शहर का पानी इन तालाबों में जमा होता था और फिर सालों भर इसका इस्तेमाल किया जाता था। इसी पानी से धीरे-धीरे वाटर रीचार्ज भी होता था जिससे धरती का वाटरलेवल मेंटेन रहता।

तालाब हमारे धरोहर
जनहित याचिका दाखिल करने वाले कॉफ्फेड के अध्यक्ष ऋषिकेश कश्यप कहते हैं, तालाब केवल पानी का कुंड नहीं है। तालाबों का समाप्त करना हमारी संस्कृति को समाप्त करने के बराबर है। तालाब जल संरक्षण के बहुत अच्छे माध्यम हैं। इसी के मद्देनजर हमारे पूर्वज तालाबों के संरक्षण पर जोर देते थे। जगह-जगह तालाब खुदवाए जाते थे, लेकिन वर्तमान में तालाबों को बचाने के लिए न तो सरकार अपनी जिम्मेदारी निभा रही है, न ही समाज।

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अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे तालाब
मत्स्य विभाग की फाइलों में पटना जिले में ही 927 तालाब हैं, जिनकी स्थिति बेहद खराब है। सरकारी फाइलों में राजधानी में 50 तालाब हैं, लेकिन अधिकांश दम तोड़ रहे हैं या दम तोड़ चुके हैं। सचिवालय तालाब एवं अदालतगंज तालाब अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री के बयान से जगी है उम्मीद
ऋषिकेश कश्यप ने बताया कि सचिवालय तालाब को नई विधान सभा निर्माण के नाम पर अधिकारियों ने समाप्त करने की तैयारी कर ली थी लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उसे पुन: बहाल करने का निर्देश दिया है। भवन निर्माण विभाग को उसे पूर्व की भांति मेंटेन रखना है। इससे एक उम्मीद जगी है। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मंत्री अवधेश कुमार सिंह ने भी मत्स्य विभाग को सचिवालय तालाब के जीर्णोद्धार करने का निर्देश दिया है। 
तालाब को भरकर बना दिया तारामंडल व रेल अस्पताल
तालाबों के संरक्षण के लिए काम कर रहे सामाजिक कार्यकत्र्ता शशि भूषण कुमार बताते हैं कि वर्तमान में जिस जगह तारामंडल बना है, वहां पर पहले तालाब हुआ करता था, लेकिन उसे भर दिया गया। इसी तरह गांधी मैदान के पास तालाब को भरकर सुभाष पार्क का निर्माण किया गया। चिरैयाटांड स्थित तालाब को भरकर रेलवे अस्पताल का निर्माण किया गया।

बहादुरपुर के पास तालाब भर दिया गया। गायघाट स्थित गुणसागर तालाब पर स्थानीय लोगों ने ही कब्जा कर लिया है। वेटेनरी तालाब को भरकर कौटिल्य नगर बसा दिया गया। इसका असर राजधानी के भू-गर्भ जल पर पड़ रहा है। तालाबों भू-गर्भ जल के मुख्य स्राेत होते हैं।

आंकड़ों की नजर में तालाब

- 927 तालाब हैं पूरे पटना जिले में
- 50 से अधिक तालाब थे राजधानी भी
- 2013 में हाईकोर्ट ने सरकारी तालाबों के जीर्णोद्धार का दिया था निर्देश

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Web Title:Water level going down in Patna ponda are also dying(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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