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बिहार में भी अब सबका साथ-सबका विकास, लेकिन राहें नहीं हैं आसान

Publish Date:Sat, 05 Aug 2017 05:05 PM (IST) | Updated Date:Mon, 07 Aug 2017 10:51 PM (IST)
बिहार में भी अब सबका साथ-सबका विकास, लेकिन राहें नहीं हैं आसानबिहार में भी अब सबका साथ-सबका विकास, लेकिन राहें नहीं हैं आसान
एक ओर मजबूत विपक्ष लेकिन एक ओर एक बार फिर बिहार में मजबूत सरकार बनी है जिससे जनता को बहुत उम्मीदें हैं। इन उम्मीदों को पूरा करना सरकार के लिए आसान नहीं है।

पटना [काजल]। बिहार में एक बार फिर से एनडीए की सरकार ने अपना काम शुरू कर दिया है, लेकिन इस बार उसके लिए चुनौतियां कम नहीं हैं। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी सरकार चुनौतियों का सामना करने की हिम्मत और आत्मविश्वास के साथ काम करने में जुट गई है।

महागठबंधन टूटने से पहले जिस तरह बिहार का राजनीतिक माहौल बना वो काफी दुखद था। लेकिन जनता ने एक अच्छी और सुलझी सरकार की फिर से वापसी को तहे दिल से स्वीकार किया है। अब अमन चैन की चाहत लिए जनता जहां विकास की राह जोह रही है, वहीं नई सरकार भी जनता की उम्मीदों पर खड़ा उतरने के लिए कृतसंकल्पित है।

पिछले कई महीने से बिहार केवल बयानबाजी झेल रहा था और राज्य मे विकास की गति रूक गई थी, नई कैबिनेट के  मंत्रियों ने पदभार ग्रहण करते ही बदलाव की आहट दे दी है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रतिदिन  सभी विभागों की समीक्षा बैठक कर रहे हैं और नई कार्यनीति पर चर्चा कर रहे हैं तो वहीं मंत्रीगण और विभागों के सचिव भी उनकी ताल में ताल मिलाकर साथ चल रहे हैं।

नीतीश कुमार अपनी गलतियों को सुधारकर नई राह पर चलने में भरोसा करते हैं। इसीलिए नई सरकार में  वो अब बिल्कुल बदले-बदले राजनेता के रूप में दिख रहे हैं। जहां एक ओर चेहरे पर विश्वास की चमक है तो दूसरी ओर बिहार को एक समृद्ध राज्य बनाने की चुनौती भी। वहीं, जनता ने भी गिले शिकवे भुलाकर अब चैन की सांस ली है।

नीतीश कुमार को अब यह एहसास हो गया है कि बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में उनसे बेहतर कोई नही और  वहीं प्रधानमंत्री के पद के लिए नरेंद्र मोदी से बेहतर भी कोई नहीं, इसीलिए उन्होंने नई सरकार बनते ही घोषणा कर दी कि पीएम मोदी में ही काबिलियत है और अगले लोकसभा चुनाव में वही पीएम बनेेंगे। उनके इस एलान पर जहां विपक्ष में खलबली मच गई है तो वहीं अब नीतीश एनडीए को एकजुट रखने में जुटे हुए हैं। 

पूरे देश की तरह अब बिहार में भी नरेंद्र मोदी को ही पीएम बनाने के लिए नीतीश कुमार 2019 की लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी को लेकर एक ओर जहां बीजेपी भी खुश है तो एनडीए के अन्य दलों ने भी वैमनस्यता भूलकर नीतीश का हाथ थाम लिया है। 

अब पूरे भरोसे के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बिहार में एनडीए को एकजुट रखने का जिम्मा नीतीश कुमार को सौंपा है। नीतीश कुमार ने भी शाह के प्लान के मुताबिक बिहार में एनडीए को एकजुट रखने की कवायद को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। नीतीश को सबसे बड़ी चिंता इस बात की थी कि कहीं उनके नेता बागी ना हो जाएं, लेकिन एेसा कुछ नही हुआ।

थोड़ी मतभिन्नता शरद यादव को लेकर है तो अब लगने लगा है कि वो भी मान जाएंगे। दरअसल, शरद महागठबंधन के टूटने से दुखी हैं तो इस जख्म पर मलहम लगाते हुए लालू ने भी पूरे विश्वास के साथ कहा कि शरद यादव को हमने राजद के साथ आने का न्यौता दिया है, इससे लगा था जदयू में दो फाड़ हो जाएगा, लेकिन शरद ने खुद इस बात से साफ इंकार कर दिया और लालू के मंसूबों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। 

नीतीश के लिए दूसरी मुश्किल बने थे हम के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी और रालोसपा के नेता उपेंद्र कुशवाहा। दोनों इस वजह से नाराज थे कि लोक जनशक्ति पार्टी से रामविलास पासवान के भाई पशुपति नाथ पारस को बिहार में मंत्री बनाया गया, लेकिन उनकी पार्टी से किसी भी नेता को नीतीश मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। 

पहले उन्होंने बगावत की और इसकी शिकायत लेकर अमित शाह के पास पहुंचे लेकिन शाह ने एेसा क्या कह दिया कि अचानक नीतीश कुमार के धुर विरोधी माने जाने वाले जीतनराम मांझी एक अणे मार्ग पहुंचे और नीतीश कुमार से मुलाकात कर सबको चौंका दिया। उसके बाद उपेंद्र कुशवाहा ने भी नीतीश कुमार से मिलकर रिश्तों में गर्माहट लाने की कोशिश की।

अब एनडीए के सभी पार्टियों के बीच संतुलन फिर से कायम हो गया है और राजनीतिक दुश्मनों से दुश्मनागत छोड़कर दोस्ती की राह पर चलने को तैयार नीतीश कुमार पीएम मोदी के लिए मिशन 2019 की तैयारी में जुट गए हैं। नीतीश कुमार की कोशिश यह है कि एनडीए में संतुलन बना रहे और तमाम सहयोगी एकजुट रहें और अगली लोकसभा चुनाव में एनडीए की ही हर जगह बंपर जीत हो।

इसके बाद विपक्षी पार्टियों के बीच भी मिशन 2019 की तैयारी करने का अब वक्त आ गया है, लेकिन बिहार में सबसे बड़े दल राजद के अध्यक्ष लालू यादव जो विपक्षी एकता के सबसे बड़े सूत्रधार हैं वो भ्रष्टाचार के मामले में चारों ओर से घिरते नजर आ रहे हैं और उनके साथ ही उनका परिवार भी परेशान है।

लेकिन इस घटनाक्रम के बाद बिहार विधानसभा में एक मजबूत विपक्षी पार्टी के रूप में स्थान मिला है जिसकी वजह से विधानसभा में नीतीश कुमार की राह आसान नहीं होगी। वहीं विधानपरिषद में राजद ने अपना दावा पेश किया लेकिन उसे हार मिली।

विधानसभा में मजबूत विपक्ष और विपक्ष के नेता के रूप में तेजस्वी यादव के तेवर को देखकर लग रहा है कि अब राजनीति की समझ और परिपक्वता उनमें आ रही है। वैसे एक राजनेता के रूप में तेजस्वी के भविष्य की झलक साफ दिख रही है। 

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Web Title:In bihar now a strong government in form but CM nitish has many challenges(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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