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सर्वोत्तम है बिहार का डीएनए : राज्यपाल

Publish Date:Fri, 21 Aug 2015 09:14 PM (IST) | Updated Date:Fri, 21 Aug 2015 09:19 PM (IST)
सर्वोत्तम है बिहार का डीएनए : राज्यपाल
बिहार के जीन को सर्वोत्तम बताते हुए शुक्रवार को राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने प्रदेश में पैदा हुए महापुरुषों की तारीफ के पुल बांध दिए। शब्दों का मरहम लगाते हुए कहा कि दुनिया में बिहार

पटना। बिहार के जीन (डीएनए) को सर्वोत्तम बताते हुए शुक्रवार को राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने प्रदेश में पैदा हुए महापुरुषों की तारीफ के पुल बांध दिए। शब्दों का मरहम लगाते हुए कहा कि दुनिया में बिहार के सपूतों की भूमिका श्रेष्ठतम रही है। बिहार के लोग परिश्रमी और प्रतिभाशाली हैं।

'कबीर के लोग' नामक संस्था द्वारा विधान भवन परिसर के अधिवेशन सभागार में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में कोविंद के शब्द बिहारियों के लिए अभिनंदन सरीखे थे, जबकि अभिनंदन समारोह कोविंद के सम्मान में आयोजित किया गया था।

कोविंद ने कहा कि बिहार की धरती अनगिनत महापुरुषों की जन्मभूमि और कर्मभूमि रही है। यही कारण है कि अपने शपथ-ग्रहण के तत्काल बाद बतौर राज्यपाल मैंने प्रतीकात्मक तौर पर पटना में स्थित कुछ महापुरुषों की प्रतिमा पर पुष्पमाल अर्पित कर अपनी श्रद्धा निवेदित की और एक नई परंपरा की शुरुआत की।

चाणक्य, महावीर, गौतम बुद्ध और राजेंद्र प्रसाद की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि बिहार का जीन अद्भुत है। बकौल कोविंद, बिहार की धरती तो लोकतंत्र की जननी रही है। महत्वपूर्ण यह कि लगे हाथ उन्होंने सफाई भी पेश कर दी। कहा कि मैं यहां संवैधानिक पद पर हूं।

किसी तरह की राजनीति करने नहीं आया हूं। उन्होंने कहा कि संविधान में दो महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हुए हैं। पहला, शिक्षा का अधिकार और दूसरा, वोट का अधिकार। असमानता मिटाने में शिक्षा सबसे प्रभावी है, लेकिन इस अधिकार का प्रयोग वंचित समाज द्वारा नहीं किया जा रहा।

दुर्भाग्य यह कि देश की पूर्ववर्ती सरकारों ने शिक्षा पर महत्वपूर्ण ध्यान नहीं दिया। जब हम वोट के अधिकार की बात करते हैं तो हम सब लोग, विशेष कर समाज के कमजोर वर्ग, उसके राजनीतिक महत्व को समझने में असफल रहते हैं। केवल और केवल आपका वोट ही है, जो आपके आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एक मजबूत स्तम्भ बन सकता है।

कोविंद ने चाणक्य की ईमानदारी, राष्ट्रप्रेम और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल देते हुए दलित समाज से शिक्षित होने और मतदान करने की अपील की। हक हासिल करने के लिए शिक्षा और मताधिकार का महत्व समझाया। उदाहरण देकर शिक्षित होने और मतदान करने के फायदे गिनाए। केरल की तरह बिहार को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि राज्यपाल की न कोई जाति होती है, न कोई मजहब, उसका न कोई धर्म होता है, न कोई दल। राज्यपाल संवैधानिक तौर पर पूरे राज्य का मुखिया और अभिभावक होता है। राज्यपाल ने कहा कि बिहार राजभवन के दरवाजे सबकेलिए खुले हैं।

उन्होंने दलित और पिछड़ा समाज को सरकार पर मदद के लिए आश्रित रहने के बजाय स्वावलंबी बनने की सीख दी। कहा कि सरकार पर निर्भर रहने की मानसिकता से उबरना होगा। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की नजीर पेश करते हुए दलितों से शिखर तक पहुंचने का आह्वान किया।

इस दौरान महामहिम को दलित वर्ग से जुड़े विभिन्न कर्मचारी संगठनों और समाज बंधुओं ने अंग वस्त्र, पुष्पगुच्छ और प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान ने किया। अभिनंदन समारोह को महाराष्ट्र के सांसद रामदास अठवाले, महावीर मंदिर के मुख्य पुजारी फलहारी बाबा, पूर्व गृह सचिव जियालाल आर्य, पूर्व डीजीपी जीपी दोहरे, सहित दलित समाज से जुड़े आइएएस, आइपीएस अधिकारियों के अलावा शिक्षाविदों ने संबोधित किया।

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Web Title:DNA of Bihar is wonderfull : Governor(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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