सरकारी दफ्तरों में अटकीं निजी स्कूलों की मनमानी की शिकायतें

Publish Date:Tue, 18 Jul 2017 03:07 AM (IST) | Updated Date:Tue, 18 Jul 2017 03:07 AM (IST)
सरकारी दफ्तरों में अटकीं निजी स्कूलों की मनमानी की शिकायतेंसरकारी दफ्तरों में अटकीं निजी स्कूलों की मनमानी की शिकायतें
पटना । राजधानी के निजी स्कूलों की मनमानी के दर्जनों आवेदन जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिलाि

पटना । राजधानी के निजी स्कूलों की मनमानी के दर्जनों आवेदन जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिलाधिकारी कार्यालय में धूल फांक रहे हैं। शिकायत के निपटारे में देरी के कारण कई अभिभावकों ने खुद को समझौतावादी बना लिया है तो कुछ न्याय की आस में कोर्ट पहुंच गए हैं। डीईओ और डीएम कार्यालय की तथाकथित व्यस्तता का आलम यह है कि बाल संरक्षण आयोग के कई बार लिखने के बाद भी इस संबंध में जवाब देना उचित नहीं समझा गया।

बिहार बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. हरपाल कौर ने बताया कि कुछ मामले संज्ञान में आए हैं। इसकी रिपोर्ट संबंधित विभाग और अधिकारियों से तलब की जा रही है। वहीं इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी ठाकुर मनोरंजन प्रसाद सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने ज्वाइन किया है। अभिभावकों की शिकायतों की जांच कर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों की शिकायत है राजधानी के नामचीन निजी स्कूलों में अधिकारी और नेताओं के बच्चे पढ़ते हैं। इस कारण मामले को आगे बढ़ने ही नहीं दिया जाता है। इससे निजी स्कूल प्रबंधन की मनमानी बढ़ती ही जा रही है।

: केस एक :

आशियाना नगर के डॉ. एसपी त्रिपाठी ने बताया कि उनका पोता दीघा घाट के एक नामचीन स्कूल में कक्षा चार में पढ़ता था। एक शिक्षक ने उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। इसकी शिकायत की और स्कूल से शिक्षक पर कार्रवाई करने का दबाव बनाया तो अगले सेशन में तीन विषयों में फेल कर टीसी थमा दी गई। इसकी शिकायत जिला शिक्षा पदाधिकारी और सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय में की गई। एक साल से अधिक हो गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। विवश होकर दूसरे स्कूल में किसी तरह नामांकन कराया।

: केस दो :

गांधी मैदान के उत्तर-पूर्व स्थित एक स्कूल ने दो बच्चों को इस कारण टीसी थमा दी कि उनके पिता ने फीस में बढ़ोतरी का सार्वजनिक तौर पर विरोध किया था। अभिभावक संजीव कुमार ने बताया कि स्कूल की मनमानी के खिलाफ जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में चार माह पहले आवेदन दिया है। कार्रवाई सिफर है। बाल संरक्षण आयोग से गुहार लगाई। आयोग ने 14 फरवरी को जिलाधिकारी कार्यालय को पत्र लिखकर इस संबंध में रिपोर्ट मांगी। कार्रवाई का इंतजार है।

: केस तीन :

कदमकुआं की साधना सिन्हा ने बताया कि पिछले साल स्थानीय निजी स्कूल की मेरिट लिस्ट में नाम आने के बाद नामांकन नहीं लिया गया। स्कूल प्रबंधन ने कहा कि गलती से सूची में नाम आ गया था। इसकी शिकायत जब सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय और जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में करने की कोशिश हुई तो आवेदन लेने से ही इंकार कर दिया गया। सीबीएसई के अधिकारी ने बताया कि नामांकन संबंधित शिकायत दिल्ली कार्यालय से कीजिए। एडमिशन क्यों नहीं लिया गया यह आज भी राज ही बना हुआ है।

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: बोले अधिकारी :

निजी स्कूलों से संबंधित शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा। कुछ दिन पहले ही ज्वाइन किया है। इस कारण सभी मामले संज्ञान में नहीं हैं। अभिभावक फीस, नामांकन या अन्य किसी मामले को लेकर शिकायत करें। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।

ठाकुर मनोरंजन प्रसाद सिंह, जिला शिक्षा पदाधिकारी

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सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों में नियम के विरुद्ध कार्य पर कार्रवाई होती रही है। क्षेत्रीय कार्यालय को कार्रवाई का अधिकार नहीं है। अभिभावकों के आवेदन को दिल्ली कार्यालय स्थानांतरित कर दिया जाता है। ऑनलाइन भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

लखन लाल मीणा, क्षेत्रीय पदाधिकारी, सीबीएसई (पटना जोन)

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Web Title:complaints against prestigious private schools not entertained by government officials(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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