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फर्जी दुल्हा, फर्जी शादी और सेक्स रैकेट में फंसाई जातीं लड़कियां ...जानिए

Publish Date:Tue, 02 Aug 2016 08:20 PM (IST) | Updated Date:Wed, 03 Aug 2016 05:51 PM (IST)
फर्जी दुल्हा, फर्जी शादी और सेक्स रैकेट में फंसाई जातीं लड़कियां ...जानिए
बिहार के सीमांचल में हर साल बाढ़ के दौरान मानव तस्करों की सक्रियता बढ़ जाती है। वे इलाके की गरीब लड़कियों को झूठी शादियों के बहाने कब्जे में लेकर उन्हें सेक्स रैकेट में धकेलते हैं।

कटिहार [नीरज कुमार]। बाढ़ से सलाना तबाही बिहार के सीमांचल इलाके में मानव तस्करों की राह आसान कर देता हैे। बाढ़ से तबाह गरीब लोगों के लिए बेटियाें की शादी टेढ़ी खीर हो जाती है। इस बेबसी का लाभ मानव तस्कर उठाते हैं। यहां शादी की आड़ में मानव तस्करी का खेल शुरू हो जाता है। शादी के बाद दूल्हा तो दूर, लोग अपनी बेटी को भी नहीं ढूंढ़ पाते हैं। इनमें अधिकांश को सेक्स रैकेट में लगा दिया जाता है।

बता दें कि सीमांचल के कटिहार, किशनगंज, अररिया व पूर्णियां के अधिकांश भागों में बाढ़ का कहर हर साल जमकर टूटता है। घर-बार से लेकर किसानी तक चौपट हो जाती है। आलम यह होता है कि लोग दाने-दाने को मोहताज हो जाते हैं। बेटियों के हाथ पीले करने के अरमान पानी में ही घुल जाते हैं।

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छद्म दुल्हा लाकर करते फर्जी शादी

इन परिस्थितियों में इलाके में मानव तस्कर सक्रिय हो जाते हैं। वे दूसरे राज्यों से छद्म दुल्हा लाकर व कुछ रुपयों का लोभ देकर फर्जी शादी की आड़ में इस कार्य को अंजाम देते हैं। इसके बाद मानव तस्कर इन लड़कियों को सेक्स रैकेट में धकेल देते हैं।

सर्वे में हुआ खुलासा

'बेटी बचाओ आंदोलन' व ट्रैफिकिंग के विरूद्ध अभियान चलाने वाली संस्था 'भूमिका विहार' द्वारा पूर्णिया प्रमंडल के कटिहार, पूर्णिया, अररिया एवं किशनगंज जिले में कराए गए सर्वे में इसका खुलासा हुआ है।

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ये हैं आंकड़े

हालांकि, सरकारी आंकड़े कुछ और ही कहते हैं। सरकारी आकड़ों के मुताबिक लापता बच्चों की संख्या 159 है, जबकि संस्था की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच वर्ष में पूर्णिया प्रमंडल में बाल मानव तस्करी के 519 मामले सामने आए हैं। किशनगंज जिले में पिछले पांच वर्षों में बाल मानव तस्करी के सबसे अधिक 288 मामले सामने आए हैं। वहीं, पूर्णिया में 85, अररिया में 72 तथा कटिहार में 74 मामले सामने आए हैं।

प्रलोभन देकर करते ट्रैफिकिंग

विषम भौगोलिक स्थिति और बाढ़ व कटाव का लाभ उठाकर मानव तस्कर आराम से बच्चों के अभिभावकों को प्रलोभन देकर ट्रैफिकिंग करने में सफल हो रहे हैं।

विभागीय निर्देश का पालन नहीं

मानव तस्करी के शिकार बच्चों की तलाश को लेकर सीआइडी (कमजोर वर्ग) ने डेढ़ वर्ष पूर्व दिशा निर्देश जारी किया था। इसके तहत लापता बच्चों की तस्वीर नाम पते के साथ सरकारी वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही सभी थानाध्यक्षों को बाल संरक्षण पदाधिकारी की भूमिका का निर्वहन करने कहा था।

लेकिन, इस निर्देश का धरातल पर पालन नहीं हो पा रहा है। कटिहार में अब तक महज 18 लापता बच्चों की विवरणी ही वेबसाइट पर अपलोड की जा सकी है।

बढ़ रहे मानव तस्करी के मामले

'भूमिका विहार' की निदेशक शिल्पी सिंह कहती हैं, 'पांच वर्षों में सीमांचल क्षेत्र से बाल तस्करी के 519 मामले सामने आए हैं। निश्चित रूप से आर्थिक लाचारी भी इसकी वजह बनती है। अधिकांश मामलों में मासूम बच्चियां मानव तस्करों के चंगुल में फंस रही हैं।' उनके अनुसार प्रशासनिक स्तर पर इस दिशा में ठोस पहल नहीं किए जाने से मानव तस्करी के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

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Web Title:Girls trapped in sex racket by fake marriages in Bihar(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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