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मानव तस्करी की मंडी में सुबकते मासूम

Publish Date:Fri, 05 Feb 2016 08:10 AM (IST) | Updated Date:Fri, 05 Feb 2016 04:50 PM (IST)
मानव तस्करी की मंडी में सुबकते मासूम
बच्चों की तस्करी के मामले में सीमांचल ट्रांजिट प्वाइंट बनता जा रहा है। स्वयंसेवी संस्था 'भूमिका विहार' की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक कटिहार, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज में पिछले पा

कटिहार [नीरज कुमार]। बच्चों की तस्करी के मामले में सीमांचल ट्रांजिट प्वाइंट बनता जा रहा है। स्वयंसेवी संस्था 'भूमिका विहार' की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक कटिहार, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज में पिछले पांच वर्षों के दौरान 519 बच्चे गायब हुए हैं। इनमें कई लड़कियां भी शामिल हैं। इन्हें शादी का झांसा देकर देह व्यापार के धंधे में धकेल दिया जाता है।

रिपोर्ट के आंकड़ों पर गौर करें तो पूर्णिया प्रमंडल में हर साल औसतन सौ बच्चे गायब हो रहे हैं। वहीं, पिछले पांच वर्षों में किशनगंज में चाइल्ड ट्रैफिकिंग के 288 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि पूर्णिया में इसकी संख्या 85 रही है।

गरीबी और अशिक्षा बनी वजह

स्वयंसेवी संस्था की रिपोर्ट पर यकीन करें तो गरीबी और अशिक्षा बच्चों की तस्करी के मुख्य कारण हैं। दलाल भोले-भाले अभिभावकों को सब्जबाग दिखाकर बच्चों की तस्करी करते हैं। वहीं, प्रशासन की सुस्त चाल भी दलालों के मंसूबे को नाकाम नहीं कर पा रही है।

इस संबंध में भूमिका विहार नामक संस्था की निदेशक शिल्पी सिंह ने बिहार सरकार से बच्चों की तस्करी पर नकेल कसने की अपील की है और संस्था की सर्वे रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेज दी है।

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Web Title:Bihar's Seemanchal area remains a transit point for the trafficking of children(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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