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अतिक्रमण से शहर में जाम लगना बनी नियति

Publish Date:Tue, 21 Mar 2017 03:03 AM (IST) | Updated Date:Tue, 21 Mar 2017 03:03 AM (IST)
अतिक्रमण से शहर में जाम लगना बनी नियतिअतिक्रमण से शहर में जाम लगना बनी नियति
जमुई। जमुई को अगर जाम का शहर कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

जमुई। जमुई को अगर जाम का शहर कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। जाम की वजह अतिक्रमण है। सुबह अगर आप सब्जी मंडी पहुंच जाएं तो दूर से सड़क जाम का नजारा दिखेगा। जिला प्रशासन या नगर परिषद द्वारा सब्जी विक्रेताओं को कोई ऐसा जगह आवंटित नहीं किया गया है जहां वे सब्जी बेच सकें। बात दो वर्ष पुरानी है। जब थाना के समीप अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। सड़क किनारे सब्जी बेच रहे दुकानदारों का दुकान हटने से सड़कें चौड़ी दिखने लगीं। विकल्प के तौर पर पंचमंदिर के समीप नगर परिषद द्वारा 15 दुकान का निर्माण कराया गया है। आज भी निर्मित दुकानें बगैर दरवाजे और शटर के वैसे ही पड़ी है। लोग अवैध रूप से उन दुकानों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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सब्जी मंडी के लिए बनाई गई थी 20 दुकानें

12 वर्ष पूर्व जमुई थाना के ठीक सामने कन्या मध्य विद्यालय की चारदीवारी से सटे नगर परिषद ने 20 दुकानों का निर्माण कराया था। दुकान बनाने का मकसद यही था कि सड़क का अतिक्रमण कर सब्जी बेच रहे दुकानदारों को दुकानें मुहैया कराई जाए। बाद में पैसे के बल पर व्यवसायियों को दुकानों का आवंटन कर दिया गया। सब्जी विक्रेता सड़क पर ही सब्जी बेचते रह गए। कई ऐसी दुकानें हैं जिसका आवंटन किसी अन्य व्यक्ति के नाम से है और वह भाड़े पर दूसरे व्यक्ति को दुकान दे दिया है। ऐसा करने के पीछे मोटी कमाई की बात बताई जाती है। दरअसल, सरकारी दुकान का किराया कम होता है और ऊंचे किराये पर आवंटित कराने वाले व्यक्ति दूसरे को दे देते हैं।

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बाजार समिति की दुकानों का भी है वही हाल

त्रिपुरारि प्रसाद ¨सह मार्ग कहे या गिरीश टॉकिज रोड। सड़क के किनारे 14 दुकानों का निर्माण बाजार समिति द्वारा कराया गया था। मकसद था कि सड़क का अतिक्रमण न हो। वहां भी यही स्थिति बनी। व्यवसायियों ने उन दुकानों का आवंटन अपने नाम करा लिया। सब्जी वाले फिर मुंह देखते रह गए। लाचार होकर सड़कों पर दुकान चलाने को वे मजबूर हैं। सड़क किनारे अतिक्रमण कर दुकान लगाने वाले विक्रेताओं को किराये के रूप में पैसा नहीं देना पड़ता है।

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आज भी उम्मीद है कायम

सड़कों का अतिक्रमण कर दुकान चलाने वाले सब्जी विक्रेता को आज भी यह उम्मीद है कि नगर प्रशासन कहीं न कहीं उनके लिए जगह उपलब्ध कराएगा जहां वे निश्चित होकर अपना व्यवसाय कर सकेंगे। इसके लिए कई स्थलों के बारे में वे अपना विचार भी देते हैं। कचहरी रोड के किनारे सरकारी जमीन का एक बड़ा भू-भाग है जहां वे लोग सब्जी मंडी बनाने की बात करते हैं। इसके अलावा को-ऑपरेटिव बैंक, गोशाला, कल्याणपुर आहर आदि स्थलों पर भी अगर सब्जी मंडी बनाया जाए तो सड़कों के अतिक्रमण से राहत मिलेगी।

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अतिक्रमण बना है कानधेनू

नगर परिषद क्षेत्र में सड़क किनारे सब्जी, मांस-मछली की दुकानें सजी है। अधिकांश लोग अपने सामान की बिक्री सड़क किनारे करते हैं। खरीदार सड़क पर वाहन लगाकर खरीदारी करते हैं। लिहाजा जाम की स्थिति बनी रहती है। कचहरी चौक से महाराजगंज तक की स्थिति को साफ देखा जा सकता है। कहा जाता है कि सड़क का अतिक्रमण कर दुकान लगाने के पीछे भी पैसे का खेल है। नगर परिषद के लिए यह कामधेनू बना है। हद तो यह है कि सार्वजनिक जगहों पर भी मांस-मछली की दुकानें लगाकर बिक्री की जा रही है जो शहरी क्षेत्र में मानवाधिकार का उल्लंघन है।

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क्या कहते हैं दुकानदार

फोटो- 20 जमुई- 4

सब्जी विक्रेता दीपक कुमार कहते हैं कि सब्जी मंडी के नाम पर 15 दुकानें बनाई गई हैं जबकि सौ से अधिक विक्रेता हैं। पंचमंदिर रोड के समीप जहां दुकानें बनाई गई हैं अगर वहां सब्जी मंडी चला जाता है तो जाम की स्थिति बन सकती है। उस रास्ते से होकर बड़ी-बड़ी गाडि़यां चलती हैं। दुर्घटना की संभावना बन सकती है।

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फोटो- 20 जमुई- 5

मो. शाहिद खान कहते हैं कि नगर परिषद दुकान उपलब्ध करा दे तो हम लोगों को परेशानी नहीं होगी। सड़क का अतिक्रमण समाप्त हो जाएगा।

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फोटो- 20 जमुई- 6

मो. अशरफ कहते हैं कि अतिक्रमण कोई शौक से नहीं करते हैं। हम लोगों के लिए बनाई गई दुकानों पर दूसरों का कब्जा है। पैसे का खेल है। सड़क किनारे दुकान लगाने के कारण हमारा शोषण भी होता है फिर भी हम लोग चुप रहते हैं।

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फोटो- 20 जमुई- 7

मो. अयुब कहते हैं कि हर शहर में एक सब्जी बाजार होता है। अगर ऐसी व्यवस्था जमुई में हो तो हम स्वत: वहां चले जाएंगे और सड़कों का अतिक्रमण भी समाप्त हो जाएगा।

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फोटो- 20 जमुई- 8

मो. शकील कहते हैं कि अतिक्रमण करना तो हमलोगों की लाचारी है। जिन दुकानदारों को दुकान का आवंटन किया गया है वे दुकान के बाहर सड़कों पर अपना सामान सजा लेते हैं। अगर इस पर रोक लगाई जाए तो अतिक्रमण से मुक्ति मिल सकती है। हमलोग भी इसके खिलाफ हैं।

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Web Title:abhiyan(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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