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मनोरंजन के आधुनिक साधनों का हो रहा विकास

Publish Date:Thu, 14 Jun 2012 09:53 PM (IST) | Updated Date:Thu, 14 Jun 2012 09:54 PM (IST)

शमशाद 'प्रेम', आरा : शहर में मनोरंजन के साधनों का तेजी से विस्तार हो रहा है। जहां परंपरागत साधन मौजूद हैं, वहीं आधुनिक साधनों का विस्तार हो रहा है। शहर में कुछ तो स्थायी मनोरंजन के साधन हैं, वहीं कुछ अस्थायी। शहर में मौजूद चार सिनेमा हालों में से रूपम सिनेमा का अस्तित्व समाप्त होने के बाद मोती महल, मोहन व सपना सिनेमा घर बचे हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम नागरी प्रचारिणी सभागार के अलावे विभिन्न विद्यालयों व धर्मशालाओं में होता है। केबुल चैनल जो पहले शहर में था, अब यह धीरे-धीरे शहर से दूर गांवों में पहुंचने लगा है। वहीं जिले में डीटीएच व डिस टीवी का भी विस्तार हुआ है। शहर में समय-समय पर छोटे-बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होते रहा है। गत 24-27 मई तक अखिल भारतीय भिखारी ठाकुर नाट्य महोत्सव संपन्न हुआ। इसमें विभिन्न प्रांतों के लगभग 20 टीमों ने हिस्सा लिया। हां यह जरूर है कि शहर में जो एक दशक पूर्व नाटकों के निरंतर मंचन की परंपरा थी वह समाप्त हो चुकी है। नागरी प्रचारिणी सभागार व लाइट एण्ड साउण्ड का शुल्क बढ़ने के कारण हाल में होने वाले नाटकों के मंचन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। स्थानीय वीर कुंवर सिंह पार्क सौन्दर्यीकरण के बाद शहर में विशेषकर बच्चों के लिए मनोरंजन का केन्द्र बन गया है। तालाब में बोटिंग के अलावे अन्य मनोरंजन का साधन उपलब्ध कराया गया है। आरा क्लब, नागरी प्रचारिणी सभागार, वीर कुंवर सिंह स्टेडियम, रमना मैदान समेत अन्य स्थानों पर मेला, जादू आदि का आयोजन किया जाता है। कभी-कभी बहुरूपिया, छोटे-छोटे बच्चों व महिलाओं द्वारा रस्सी पर अपनी कला को प्रस्तुत करना देखने को मिलता है।

शहर में लगभग दो दर्जन सांस्कृतिक संगठन हैं, जिसमें से एक दर्जन सक्रिय हैं। कार्यक्रमों को कराने में संस्था व आयोजकों को काफी परेशानी होती है। लगभग दो दशक पूर्व कलाकारों ने प्रेक्षागृह के लिए आंदोलन किया था, लेकिन कोई सफलता उस समय नहीं मिली। वैसे इस साल सांस्कृतिक भवन तैयार हो गया है। अब सिर्फ उद्घाटन का इंतजार है। मनोरंजन टैक्स जिले से सरकार कितना वसूलती है, इसकी जानकारी नगर निगम को नहीं है।

जिले में सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर समय-समय पर खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं। खेल के प्रति नगर निगम तो नहीं, लेकिन सरकारी स्तर पर आयोजित होनेवाली खेलकूद प्रतियोगिताओं में जिला प्रशासन सक्रिय हो जाता है। शहर में वीर कुंवर सिंह स्टेडियम, रमना मैदान व न्यू पुलिस लाइन फील्ड में विभिन्न खेलों का आयोजन समय-समय पर होता है। स्टेडियम के नाम पर वर्षो पहले निर्मित वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। कई समस्याओं से जूझ रहा है यह स्टेडियम। जिले में प्रखंड स्तर पर बिहियां, कोईलवर, गड़हनी, जगदीशपुर व संदेश में स्टेडियम निर्माण के लिए राशि आवंटित की गयी है। इसमें से जगदीशपुर में स्टेडियम का निर्माण हो चुका है, बाकि अन्य प्रखंडों में स्टेडियम का कार्य निर्माणाधीन है। जिले स्तर पर चयन के बाद राज्य स्तरीय व राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शामिल होनेवाले खिलाड़ियों को सरकारी स्तर पर चंद सुविधाएं मिलती हैं। विभिन्न खेल संघों के माध्यम से जिले व प्रदेश का प्रतिनिधित्व करनेवाले खिलाड़ियों को कोई सुविधाएं नहीं मिलती हैं। स्थानीय वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में जिला खेल पदाधिकारी का कार्यालय है। इस कार्यालय में जिला खेल पदाधिकारी बैठते हैं। खेलकूद के मामले में जिला निरंतर सक्रिय है। वैसे बच्चों के पारंपरिक खेलकूद लुप्त होते जा रहा है। जिले में लगभग एक दर्जन खेल संगठन हैं। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल की दुनिया में जिले के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते रहे हैं। खेल व खिलाड़ियों के विकास के लिए गतिरोध आज भी बरकार है।

जिले में प्रतिभावान खिलाडि़यों की कमी नही है। खेल कैलेंडर के विमोचन के बाद खेलकूद के आयोजन में सक्रियता बढ़ेगी। विद्यालयों में खेलकूद का माहौल समाप्त होते जा रहा है। छात्र-छात्राओं में खेल के प्रति जागरूकता बढ़ाने को लेकर एक-दो माह में सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की एक प्रतियोगिता आयोजित की जायेगी। इससे काफी लाभ होगा।

संजीव कुमार सिंह

जिला खेल पदाधिकारी

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