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दादी-नानी की कहानी से रु-ब-रु होंगे स्कूली बच्चे

Publish Date:Sun, 01 Sep 2013 02:09 AM (IST) | Updated Date:Sun, 01 Sep 2013 02:10 AM (IST)

जागरण प्रतिनिधि,भागलपुर : सीबीएसई स्कूलों में बच्चों को अच्छे संस्कार और नैतिक ज्ञान के लिए सांस्कृतिक मूल्य वाली कहानियां और परंपराओं से जुड़े किस्से पढ़ाए जाएंगे। यानी लोक परलोक की सैर कराती दादी-नानी की कहानियों में निहित शिक्षा और भारतीय संस्कारों का जो सार मिलता था अब वह कोर्स की किताब में शामिल हो गया है। सीबीएसई स्कूल में पढ़ रहे छात्र-छात्रा अब भारतीय परंपराओं को वैज्ञानिक तरीके से जानेंगे। सीबीएसई के सिटी कोर्डिनेटर चंद्रचूड़ झा ने कहा कि इसके लिए बोर्ड ने इस साल से व्यवसायिक कोर्स के साथ 'नॉलेज ट्रेडिशंस एंड प्रैक्टिस ऑफ इंडिया' कोर्स शुरू किया है। मौजूदा शैक्षणिक सत्र में शुरू हुए इस कोर्स का लाभ 11वीं कक्षा के छात्रों को मिलेगा। इसके तहत छात्रों को भारतीय रीति-रिवाजों से संबंधित विभिन्न पहलुओं के बारे में प्रायोगिक जानकारी दी जाएगी। बोर्ड ने इस बाबत सभी स्कूलों को निर्देश भेज दिया है।

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बनाए गए हैं दस माड्यूल

कोर्स का डिजाइन करते समय शिक्षण पद्धति पर विशेष ध्यान दिया गया है। ताकि छात्र पुरानी बातों को मौजूदा समय से जोड़ पाएं और भारतीय परंपरा के विभिन्न अनुखंड में छिपे रहस्य को गहनता से समझ पाएं। इसके तहत 11वीं कक्षा के लिए दस माड्यूल तैयार किए गए हैं। वहीं 12वीं कक्षा का अभी एक माड्यूल तैयार हुआ है। बाकी नए सत्र में तैयार हो जाएंगे।

इन माड्यूल में भारतीय संस्कृति के पंचतंत्र, हितोपदेश , नृत्य, खगोल विज्ञान, माप विद्या व वास्तुकला को शामिल किया गया है। इस कोर्स में 70 अंक की थ्योरी और 30 अंक रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए रखे गए हैं। इसका उद्देश्य परंपराओं का ज्ञान देना है।

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तर्क से जानेंगे परंपरा

कोर्स के जरिए भारतीय संस्कृति के पुराने किस्सों, घटनाओं और वेदों-पुराणों में दिए गए तर्क को बताते हुए छात्रों में भारतीय परंपरा का भाव पैदा करना है।

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    Web Title:(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)
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